भोपाल: मप्र के चार टाईगर रिजर्व में बाघों को बचाने हेतु बनाये कंजर्वेशन प्लान केंद्र सरकार के पास लम्बे समय से लंबित पड़े हुये हैं। इनमें बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व के लिये कोर सब प्लान केंद्र के एनटीसीए के उप महानिदेशक के पास लंबित है जबकि पेंच टाईगर रिजर्व का कंजर्वेशन प्लान एनटीसीए के एआईजी के पास अनुमोदन के लिये पड़ा हुआ है।
इसी प्रकार, कान्हा टाईगर रिजर्व के बफर प्लान का अनुमोदन भी अतिरिक्त वन महानिदेशक बाघ परियोजना ने अब तक नहीं किया है जबकि पन्ना टाईगर रिजर्व एवं गंगऊ अभयारण्य की ईको सेंसेटिव जोन की अंतिम अधिसूचना उप वन महानिदेशक वन्यप्राणी डिविजन नई दिल्ली के पास लंबित पड़ी हुई है।
क्या होता है टाईगर रिजर्व के कंजर्वेशन प्लान:
टाइगर रिजर्व के कंजर्वेशन प्लान का मकसद, बाघों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए एक योजना बनाना होता है। इस प्लान में कोर जोन और बफर जोन के लिए अलग-अलग एक्शन प्लान तैयार किए जाते हैं। टाइगर रिजर्व के कंजर्वेशन प्लान के तहत, बाघों के संरक्षण के लिए कई तरह की गतिविधियां की जाती हैं।
इनमें बाघों के लिए स्पेशल फंड का प्रावधान, बाघों की सुरक्षा के लिए निगरानी पद्धतियों का इस्तेमाल, और बाघों से जुड़े संघर्षों को कम करने के लिए काम करना शामिल है। इसमें बाघों के संरक्षण के लिए तकनीकी सहायता भी दी जाती है। इसमें संघर्ष की स्थिति, बाघों की मौत, और बाघों के प्रबंधन से जुड़े दूसरे विषयों के लिए मानक प्रक्रियाएं बनाई जाती हैं। बाघों के संरक्षण के लिए बाघ रिजर्व को वित्तीय सहायता भी दी जाती है।