धर्मगुरु कालीचरण एक बार फिर चर्चा में हैं। अलीगढ़ के संत समागम में उन्होंने एक बार फिर विवादित बयान दिया।उनका बयान समाज में नफ़रत फैलाने वाला है। कालीचरण ने कहा, हिंदू राष्ट्र के निर्माण के लिए सभी हिंदुओं को एकजुट होकर धर्म के आधार पर मतदान करना चाहिए। यह बयान कालीचरण ने रविवार को अलीगढ़ के अचल ताल के रामलीला मैदान में संत समागम सम्मेलन में दिया। उन्होंने कहा, भारत में केवल सनातन धर्म है और इसके अलावा कोई धर्म नहीं हैं।
राजनीति से ही हिन्दू राष्ट्र की स्थापना संभव-
कालीचरण यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा, इस्लाम और ईसाई एक ही धर्म हैं। देश को इस्लाम की तरफ़ ले जाया जा रहा है। पिछले 800 साल में देश में 5 लाख मंदिर तोड़े गए और 80 हजार महिलाओं का रेप किया गया। अगर देश हिंदू राष्ट्र नहीं बना तो ऐसा ही होगा। सभी हिंदू नफरत की राजनीति बंद करों क्योंकि राजनीति से ही हिन्दू राष्ट्र की स्थापना संभव है। इराक, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों ने हार मान ली और मुस्लिम राष्ट्र बन गए। इतना ही नहीं कालीचरण ने अलीगढ़ में कई ऐसी बातें कही हैं जो बहुत ही भयावह थीं।
पहले बापू का अपमान और अब हिंदू-मुसलमान-
ये वहीं कालीचरण महाराज है जिसने दिसंबर में महात्मा गांधी का अपमान किया था। उन्होंने बापू के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसके बाद उन्हें जेल जाना पड़ा था। उन्होंने गांधी के खिलाफ़ आपत्तिजनक बयान छत्तीसगढ़ में दिया था और अब वे धार्मिक बयान देकर देश को बांटने की बात कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि ऐसे धर्मगुरुओं को कौन नियंत्रित करेगा? इन्हें समाज को विभाजित करने वाले बयान देने की अनुमति कैसे दी जाती है? ऐसे आपत्तिजनक बयानों के बाद भी इनपर कार्यवाहीं क्यों नहीं होती हैं।
कौन है कालीचरण?
कालीचरण का असली नाम अभिजीत धनंजय सरग है और वह शिवाजी नगर, अकोला, महाराष्ट्र के रहने वाले है। शिव तांडव के बाद छत्तीसगढ़ में वह महात्मा गांधी का अपमान कर सुर्खियों में आए थे। इसके बाद कालीचरण को पुलिस ने मध्य प्रदेश के छतरपुर से गिरफ्तार किया। करीब तीन महीने जेल में बिताने के बाद उन्हें जमानत मिल गई। जेल से छूटने के बाद भी कालीचरण बापू के बयान पर अड़े रहें।