ग्वालियर न्यूज: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की पूजा को लेकर विवाद हो गया। अखिल भारत हिंदू महासभा शुक्रवार, 19 मई को नाथूराम गोडसे का 114वां जन्मदिन मनाने पर जोर दे रही है। इसके लिए अखिल भारतीय हिंदू महासभा के पदाधिकारियों ने ग्वालियर में जलाल खां की गोठ में कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां नाथूराम गोडसे की तस्वीर लगाकर फल बांटने की कोशिश कर रहे थे और तस्वीर की आरती उतार रहे थे।
पुलिस को खबर मिलते ही फोर्स मौके पर पहुंच गई और हिंसक तरीके से हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं से नाथूराम गोडसे की तस्वीर छीन ली और उसे ढक कर अपने साथ ले गई। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद हिंदू महासभा के कार्यकर्ता भड़क गए और बीजेपी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। हिंदू महासभा द्वारा ऐसा किए जाने के बाद कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया आई और उनके प्रदेश प्रवक्ता ने अखिल भारतीय हिंदू महासभा पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर डाली।
जब हिंदू महासभा को नाथूराम गोडसे की पूजा करने से रोका गया तो महासभा के अध्यक्ष जयवीर भारद्वाज और अन्य पदाधिकारियों ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया। हिंदू महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि वे हर साल 19 मई को नाथूराम गोडसे का जन्मदिन मनाते हैं और पूजा-आरती भी करते हैं।
उनकी नाथूराम गोडसे में आस्था है और पुलिस उन्हें गोडसे की पूजा करने से नहीं रोक सकती। वहीं, पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जो करना है अपने घर के अंदर करो। सार्वजनिक स्थान पर नाथूराम गोडसे की पूजा-आरती या अन्य कोई कार्यक्रम होने पर पुलिस कार्रवाई करेगी।
देशभर में गोडसे की मूर्तियां लगाने के लिए पीएम मोदी से अनुमति मांगी गई है।
पुलिस कार्रवाई से नाराज अखिल भारत हिंदू महासभा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देशभर में नाथूराम गोडसे की मूर्तियां लगाने की मांग की है। हिंदू महासभा ने उन्हें देशभक्त कहा है। आपको बता दें कि अखिल भारत हिंदू महासभा का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल या विश्व हिंदू परिषद से कोई सीधा संबंध नहीं है।
अखिल भारत हिंदू महासभा खुद अपने संगठन को आरएसएस और बीजेपी से अलग बताती है। नाथूराम गोडसे के मामले में, भाजपा ने हमेशा ऐसी गतिविधियों की निंदा की है, और इसलिए हिंदू महासभा के कार्यकर्ता अक्सर भाजपा सरकार के दौरान पुलिस से भिड़ गए। गौरतलब हो कि कुछ साल पहले इसी अखिल भारत हिंदू महासभा ने ग्वालियर में नाथूराम गोडसे की मूर्ति स्थापित कर नाथूराम गोडसे का मंदिर बनाने की कोशिश की थी, जिसके बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए मूर्ति को हटवा दिया था।