देश भर में कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहें है, जिससे केंद्र सरकार चिंतित है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्रियों की समीक्षा बैठक बुलाई है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो जाए। पीएम मोदी ने देश भर के सभी मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठककर कोरोना के बढ़ते प्रकोप को रोकने के उपायों और तैयारियों पर समीक्षा की। बैठक में मोदी के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया शामिल हुए।

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पीएम की मुख्यमंत्रियों के साथ अहम बैठक-

पीएम ने आज विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अहम बैठक की। बैठक में बढ़ते कोरोना संकट पर चर्चा हुई। बैठक के बाद पीएम मोदी ने कहा कि पिछले दो हफ्तों से कुछ राज्यों में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, जिससे सावधानी बरतने की जरूरत है।

संक्रमण को लेकर शिक्षक व अभिभावक सतर्क रहें। कोरोना का खतरा पूरी तरह टला नहीं है, संक्रमण को जल्द रोकना हमारी प्राथमिकता है। इसीलिए बच्चों का टीकाकरण हमारी पहली प्राथमिकता है।

मोदी ने कहा,12 साल से कम उम्र के बच्चों को भी अब कोरोना की वैक्सीन लगेगी, जिसमें स्कूलों को प्रमुख भूमिका निभानी होगी। पिछले दो वर्षों में कोरोना पर हमारी यह 24वीं बैठक है, जिस तरह से केंद्र और राज्यों ने मिलकर काम किया है और कोरोना के खिलाफ देश की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई है, मैं सभी कोरोना योद्धाओं की प्रशंसा करता हूं।

बता दें कि पीएम मोदी की ये बैठक बेहद नाजुक समय में हो रही है। देश में इस समय कोरोना की चौथी लहर आने की संभावना है। पिछले 24 घंटे में करीब 3,000 मामले सामने आए हैं, जबकि 32 लोगों की जान चली गई है।

कर्नाटक में मास्क और सामाजिक दूरी अनिवार्य-

इस बीच, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि उन्होंने राज्य में फेस मास्क पहनना और सामाजिक दूरी रखने को अनिवार्य बनाने का फैसला किया है। साथ ही प्रधानमंत्री के साथ बैठक के बाद केंद्र सरकार की सलाह पर आगे कदम उठाए जायेंगे।

राजधानी में दो हफ्ते में छह गुना मरीज

इन सबके बीच देश की राजधानी में होम क्वारंटाइन किए गए मरीजों की संख्या छह गुना से ज्यादा बढ़ गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में कोरोना मरीजों की संख्या 11 अप्रैल को 447 से बढ़कर 24 अप्रैल को 2,812 हो गई। इस दौरान अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या भी 17 से बढ़कर 80 हो गई है। हालांकि दिल्ली सरकार ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि राजधानी में नए मामले बढ़ने के बावजूद अस्पताल में मरीजों की भर्ती दर बेहद कम है।