Covid In India: भारत में 23 दिसंबर को कोविड-19 के 752 नए मामले रिकॉर्ड किए गए हैं. सबसे ज्यादा संक्रमित मरीज केरल में रिकॉर्ड किए गए. बीते 24 घंटे में कोविड की वजह से चार लोगों की मौत भी हो गई. कोविड-19 की वजह से केरल में दो, राजस्थान और कर्नाटक में एक-एक मरीज की मौत हुई है. फ़िलहाल, देश में अभी कोविड के एक्टिव केस की संख्या 3,420 है.

दरअसल, रोजाना बढ़ते कोरोना मामलों ने सभी की चिंताएं बढ़ा दी हैं. जिससे देशभर में कोविड-19 के एक नए सब-वेरिएंट JN.1 को लेकर सतर्कता बरती जा रही है. इस सब-वेरिएंट को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने सभी राज्यों के स्वास्थ्य महकमें को पूरी तरह से अलर्ट मोड पर रखा हैं. केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे कोविड-19 के स्वैब के नमूनों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजें, ताकि वेरिएंट के बारे में पता चल सके.

देश में मिले अब तक 400 से अधिक सब-वेरिएंट-

इंडियन SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा ने कोविड-19 की मौजूदा स्थिति पर एक समाचार एजेंसी से चर्चा करते हुए बताया कि उन सभी लोगों को सावधानी बरतने की ज़रूरत है जो 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं. जिन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हैं. ऐसे लोग दवाइयों का सेवन करते हैं, जो इम्युनिटी को कम करती हैं. जैसे, कैंसर के मरीज. उन्हें सावधानी बरतने की सलाह मैं दूंगा. बाकी अन्य लोगों को टीके की किसी अतिरिक्त खुराक की आवश्यकता नहीं है.

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उन्होंने आगे कहा कि ओमीक्रॉन के कई सब-वेरिएंट के बारे में पता चला है. लेकिन, उनमें से कोई भी जोखिम बढ़ाने वाला नहीं है. हर हफ्ते आप अलग-अलग हिस्सों में कुछ नया सुनते हैं और फिर यह पूरे भारत में फैल जाता है. हमने इस वायरस के 400 से अधिक सब-वेरिएंट की पहचान की है. अच्छी बात यह है कि इनमें से कोई भी ओमीक्रॉन वेरिएंट वास्तव में जोखिम बढ़ाने वाला नहीं है. इनसे गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने जैसी स्थिति नहीं आएगी.

जेएन.1 सब-वेरिएंट के लक्षणों की हुई पहचान-

डॉ. एनके अरोड़ा ने जेएन.1 सब-वेरिएंट के ख़ास लक्षणों के बारे में बताते हुए कहा, यह भी ओमीक्रॉन के अन्य सब-वेरिएंट की तरह ही है. इनमें बुखार, सर्दी-खांसी, दस्त और शरीर दर्द जैसे लक्षण होते हैं. हालांकि, ये दो से पांच दिन में ठीक हो जाते हैं. यहीं वजह हैं कि केस बढ़ रहे हैं, लेकिन हॉस्पिटल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या काफी कम है.

उन्होंने बताया कि हमें जेएन.1 सब-वेरिएंट से घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि सतर्कता की जरूरत है. मैं हर किसी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमें सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन घबराने की बिल्कुल भी नहीं. हाल ही में WHO ने भी जेएन.1 वेरिएंट को लेकर सतर्क रहने का दिशानिर्देश जारी किया था. जिसमें बताया था कि डेटा के आधार पर JN.1 को बहुत जोखिम वाला वेरिएंट नहीं कहा जा सकता हैं.