भोपाल। एमपी टीम को रणजी विजेता बनाने में प्रमुख भूमिका निभानेवाले क्रिकेटर कुमार कार्तिकेय अपने घर कानपुर पहुंचे हैं. वे पूरे नौ साल बाद घर पहुंचे। आइपीएल और घरेलू क्रिकेट में अपनी चमक बिखेर चुके कुमार कार्तिकेय सिंह सालों बाद घर पहुंचे तो मां पिता की आंखें छलक उठीं. दरअसल  कुमार कार्तिकेय ने क्रिकेट में बड़ा नाम बनने के बाद ही घर लौटने की कसम खाकर घर छोड़ दिया था। उत्तर प्रदेश में किस्मत ने साथ नहीं दिया तो वे दिल्ली पहुंच गए और यहां भी बात नहीं बनी तो मध्य प्रदेश आ गए। यहां कुमार कार्तिकेय की गेंदों ने ऐसी फिरकी ली कि एमपी पहली बार रणजी चैंपियन बन गया। 

इस दौरान कुमार कार्तिकेय ने आइपीएल में भी मुंबई इंडियंस की ओर से अपनी चमक बिखेरी। उनकी कसम पूरी हो चुकी थी और मां के बुलावे पर बेटा घर लौट आया। कानपुर रेलवे स्टेशन पर जैसी ही कुमार कार्तिकेय को देखा, मां सुनीता सिंह ने दौड़कर उन्हें अपने गले से लगा लिया। वे कुछ बोली नहीं बस रोती चली गईं। कुमार कार्तिकेय की आंखें भी डबडबा गईं। पुलिसकर्मी पिता श्यामनाथ सिंह भी भावुक हो गए।

मां सुनीता ने बताया कि बेटा इतने साल दूर रहा पर बहुत चिंता होती थी। उसने बहुत तकलीफ देखी है। जब वह घर से चला गया तो सोचती थी कि कहां खाना खाता होगा, कैसा खाना मिलता होगा. उससे पूछती थी कि कब आओगे तो कहता कि जिस दिन कुछ बनूंगा तो घर लौटूंगा।

कार्तिकेय जब छोटे थे तो पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि अच्छी किट दिला सकें। कुमार दिल्ली में रहने गए तो अपना खर्च उठाने के लिए उन्होंने फैक्ट्री में मजदूरी तक की। वे दिन में प्रेक्टिस करते थे और रात में काम। मजदूरी करने के बाद कई किमी पैदल चलकर अभ्यास के लिए भी जाते थे। इससे बस किराए के पैसे बचते थे जिससे वे बिस्कुट खा लेते थे। कभी भी परिजनों को यह जानकारी नहीं दी।