Crude Oil Price Hike: कच्चे तेल की कीमत 2014 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। रूस-यूक्रेन संकट के मद्देनजर, क्षेत्र के ऊर्जा निर्यात में महत्वपूर्ण व्यवधानों की आशंका है। रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, जो मुख्य रूप से यूरोपीय रिफाइनरियों को कच्चा तेल बेचता है। रूस यूरोप में प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।

फिलहाल कच्चे तेल में तेजी के लिए यूक्रेन-रूस संकट जिम्मेदार है। लेकिन इसके अलावा, कुछ बूम बेसिक्स भी हैं। जो कीमतों को ऊंचा रख सकते हैं। मंदी की ओर, इस साल के अंत में, जब यू.एस. ने ईरान के तेल निर्यात में कटौती की। ईरान परमाणु समझौता तेल की कीमतों को 90 डॉलर या 90 डॉलर से नीचे धकेल सकता है।

भारत पर यूक्रेन-रूस संकट का प्रभाव -

मौजूदा संकट भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह अपनी कच्चे तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से घरेलू कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ सकती है। कोविड महामारी फैलने के बाद से देश में पेट्रोल, डीजल और अन्य प्रकार के ईंधन की मांग बढ़ रही है। अगर देश में खपत बढ़ती है, तो देश का आयात सीधे तौर पर बढ़ेगा। नतीजतन, बजट बाधित होता है और राजकोषीय घाटा बेकाबू हो जाता है। इस बीच, यूक्रेन पर युद्ध की घोषणा करने से गैस की कीमतों पर कई प्रभाव पड़ सकते हैं। इसका असर अप्रैल तक देखने को मिल सकता है।

जानिए यूक्रेन के ताज़ा हालात :