हिमाचल प्रदेश के बाद अब गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का भी ऐलान हो गया है. हिमाचल में बीजेपी और कांग्रेस की सीधी टक्कर है. तो वहीं गुजरात में अब तक बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला रहता था लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में लगी हुई है.  

 

गुजरात चुनाव की तारीखों का ऐलान-

इस बीच मुख्य चुनाव आयोग ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए दो चरणों में तारीखों का ऐलान करते हुए कहा कि 1 दिसंबर को पहले, तो वहीं 5 दिसंबर को दूसरे चरण की वोटिंग होगी. साथ ही नतीजे 8 दिसंबर को हिमाचल के साथ ही घोषित किये जायेंगे. गुजरात चुनाव के पहले चरण में 89 तो वहीं दूसरे चरण में 93 सीटों पर वोटिंग होगी. 

विपक्ष ने दोनों राज्यों के चुनाव की तारीखों का अलग-अलग ऐलान किये जाने पर कई सवाल उठाते हुए इसे आयोग की निष्पक्षता से जोड़ दिया. हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान काफ़ी पहले ही हो चुका हैं. चुनाव आयोग ने 12 नवंबर को वोटिंग और 8 दिसंबर को नतीजे का ऐलान किया. दोनों ही राज्यों के नतीजे एक साथ घोषित किये जाने के बाद भी तारीखों के ऐलान में मतभेद से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर अब विपक्ष सवाल खड़े कर रहा हैं.

निष्पक्षता पर उठा सवाल, चुनाव आयोग का जवाब-

AAP और कांग्रेस ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसे बीजेपी का षड्यंत्र बताया. कांग्रेस की तरफ से पवन खेड़ा ने तो ये तक कह दिया कि दोनों ही राज्यों की तारीखों के ऐलान में इतना अंतर इसलिए है क्योंकि प्रधानमंत्री को सरकारी खर्च पर अपने राजनीतिक कार्यक्रम करने थे. यहां तक कि मोरबी घटना का राजकीय शोक भी तीसरे दिन हुआ ताकि पीएम मोदी गुजरात में सारे 'रिबन' काट सकें. साथ ही चुनाव आयोग की प्रेस कांफ्रेंस के बाद पत्रकारों ने भी कुछ ऐसे ही सवाल आयोग के सामने रखें.

 

इस सवालों पर मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने जवाब देते हुए कहा कि कोई ईवीएम पर सवाल उठाता है और वो चुनाव जीत जाता है तो फिर सवाल बंद हो जाते हैं. इसलिए हमारा मकसद निष्पक्ष चुनाव कराना है और चुनाव आयोग आज नहीं बना. हमेशा से ही हमारी निष्पक्षता जगजाहिर रही है. हम पूरी तरह से निष्पक्ष हैं. जब क्रिकेट का मैच होता है तो दोनों टीमें अंपायर को ब्लेम करती हैं. यहां कोई थर्ड अंपायर तो नहीं है. चुनाव आयोग आज तो बना नहीं है ये एक विरासत है. हमारी ड्यूटी यह है कि निष्पक्षता जो पहले से बनी है, उसे हम आगे बढ़ाएं. फ़िलहाल इस सफाई के बाद भी आयोग पर कई सवाल उठ रहें हैं.