भोपाल, 

मप्र में भी अन्य कई राज्यों की तरह बिजली का संकट भीषण होने लगा है। गांवों कस्बों में अघोषित कटौतियों के बीच अब बड़े शहरों में भी यही हो रहा है। आज भोपाल में सुबह से कई इलाकों की बिजली गुल रही। नये भोपाल की बड़ी बस्तियों में सुबह 6 बजे से साढ़े नौ बजे तक बिजली गुल रही। दिन में भी कटौती अन्य इलाकों में की जा रही है। यही हाल अन्य शहरों का भी है। इसकी वजह कोयला संकट मानी जा रही है। बताया जाता है कि मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी के चार बिजली घरों में से तीन में कोयले का संकट है। यहां प्रतिदिन 80 हजार टन कोयले की जरूरत है, लेकिन उसकी पूर्ति नहीं हो पा रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि यदि अब रेलवे से एक दिन भी सप्लाई बाधित होगी, तो प्रदेश में अंधेरा छा जाएगा। मौजूदा समय में बिजली की डिमांड 12 हजार मेगावाट से ज्यादा है जबकि सप्लाई 11 हजार मेगावाट ही हो पा रही है। बिजली कटौती के जरिये इस गेप को कवर किया जा रहा है। उल्लेखनीय है. कि बिजली के टैरिफ निर्धारण में उपभोक्ताओं से तीस दिन के कोयला स्टॉक का पैसा लिया जाता है। मतलब, बिजली घरों में उनकी क्षमता के अनुरूप तीस दिन का कोयला रखेंगे।  

कहां से आता है कोयला

मप्र के बिजली घरों को वेस्टर्न कोलफील्ड्स और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड से कोल ब्लॉक आवंटित है। वही सबसे बड़े प्लांट श्री  सिंगाजी को झडभा के विभिन्न ब्लॉक से कोयले की सप्लाई ट्रेन के माध्यम से होती है।