देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन, भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा के बाद जागते हैं और ब्रह्मांड का प्रभार लेते हैं। देवउठनी एकादशी को देव प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। देवउठनी एकादशी हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है जो इस बार 4 नवंबर को है।
देवशयनी एकादशी को लेकर भी कुछ नियम हैं। जिसका पालन किया जाना चाहिए। कहा जाता है कि इस दिन दोपहर के समय नहीं सोना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार दिन में भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं।
चावल से बने खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन चावल का सेवन करता है वो अगले जन्म में रेंगने वाला जानवर बन जाता है। इसके अलावा इस दिन मांस-मदिरा, प्याज, लहसुन आदि नहीं खाना चाहिए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि इस दिन किसी भी प्रकार का नशा भी न करें।
देवउठनी एकादशी के दिन किसी के मन में बुरे विचार न आए, किसी के मन में बुरे विचार न आएं और इस दिन किसी का बुरा न करें। इस दिन केवल और केवल भगवान के प्रति आस्था और भक्ति की भावना रखनी चाहिए। तभी आपकी पूजा सार्थक होगी।
तुलसी के पत्ते न तोड़ें
देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु सृष्टि की जिम्मेदारी लेते हैं। इस दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। वास्तव में तुलसी भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है। यदि कोई व्यक्ति इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ता है तो विष्णु उस पर क्रोधित हो जाते हैं।