Madhya Pradesh Assembly Election 2023: मध्यप्रदेश की सियासत में दल बदल से साथ ही नेताओं का एक दूसरे पर वार-पलटवार भी खुलकर दिखाई देने लगा है. दीपक जोशी के कांग्रेस में शामिल होने के बाद से ही बयानबाजी भी काफी जोरों पर हैं. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) लगातार बीजेपी में गुटबाजी का आरोप लगा रहे हैं. हाल ही में उनका एक बयान भी सामने आया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि बीजेपी में मुख्यमंत्री की रेस में कई नाम शामिल हैं.

इन सबके बीच उनका एक ट्वीट भी काफी सुर्ख़ियों में बना हुआ हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ट्विटर के जरिये बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं पर हमला बोला है. दिग्विजय सिंह ने ट्वीट के जरिये दावा किया कि बीजेपी में तीन गुट हैं. साथ ही उन्होंने कटाक्ष करते हुए लिखा कि बीजेपी का मूल उद्देश्य ‘जन सेवा’ नहीं बल्कि ‘धन सेवा’ हैं.

तो चलिए आगे आपको बताते हैं कि उन्होंने अपने ट्वीट के जरिये किस तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमला बोला है.

एमपी की सियासत में ट्विटर पॉलिटिक्स

दरअसल, दिग्विजय सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा कि भाजपा के तीन गुट- शिवराज भाजपा, महाराज भाजपा, नाराज भाजपा. 20 साल में शिवराज भाजपा मालम माल, 3 साल में महाराज भाजपा मालम माल. उन्होंने आगे लिखा कि इन दो भाजपा का उद्देश्य “धन सेवा” है, जन सेवा नहीं है.

तो वहीं उन्होंने आगे लिखा कि नाराज़ भाजपा- जिसने अपना खून पसीना बहाकर पहले दो भाजपा को सत्ता सौंपी. लेकिन उन्हें धन सेवा से दूर रखा केवल आदर्श का पाठ पढ़ाते रहे. वे ईमानदारी से भाजपा की सेवा करते रहे. नतीजा? आप स्वयं अपने आस पास तीनों वर्गों के भाजपाई नेताओं, उनके बच्चों व उनके परिवारों को देख लें.

https://twitter.com/digvijaya_28/status/1655362998452592640?s=20

फिलहाल, इस ट्वीट के सियासी मायने समझे तो दिग्विजय सिंह का साफ़ तौर पर यहीं कहना है कि बीजेपी के तीन गुटों में एक सीएम शिवराज का गुट है, दूसरा ज्योतिरादित्य सिंधिया का गुट हैं. तो वहीं उन्होंने तीसरे गुट में उन नेताओं और कार्यकर्ताओं का जिक्र किया जो इन दोनों ही नेताओं ने नाराज चल रहे हैं.

वैसे, चुनावी साल में इस तरह की बयानबाजी, गुटबाजी और ट्वीट पॉलिटिक्स तो चलती ही रहेगी. लेकिन हाँ नेता अपनी सियासी जमीन तलाशने के लिए इधर-उधर नजरे ज़रूर बनाये हुए हैं. ऐसे में सभी दलों को संभलकर ही चलना होगा, नहीं तो चुनावी साल में क्या पता कब, कौन, कहाँ चला जाये.

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