मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) और पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू समेत छह लोगों को 11 साल पुराने एक मामले में एक साल की सजा सुनाई है. इनके ऊपर पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है. वहीं, इसी मामले में तीन लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है. कोर्ट का फैसला आने के बाद दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि वह अब फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे.
ADJ Court का आदेश है उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। मैं ना भाजपा संघ से डरा हूँ ना कभी डरूँगा चाहे कितने ही झूठे प्रकरण बना दें और कितनी ही सज़ा दे दी जाए।
— digvijaya singh (@digvijaya_28) March 26, 2022
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11 वर्ष पुराने प्रकरण में जिसमें मेरा नाम FIR में भी नहीं था राजनीतिक दबाव में बाद में जोड़ा गया, मुझे सज़ा दी गई।
— digvijaya singh (@digvijaya_28) March 26, 2022
मैं अहिंसा वादी व्यक्ति हूँ हिंसक गतिविधियों का सदैव विरोध करता रहा हूँ।
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इस प्रकरण में दिग्विजय सिंह की प्रतिक्रिया के बाद ट्विटर पर उनके समर्थकों और विरोधियों में रोचक बहस देखने को मिली. कुछ लोगों ने दिग्विजय सिंह को हिंसा का पुजारी कहा तो कुछ लोग दिग्विजय सिंह के समर्थन में भी आए.
सरासर झूट उस समय का वीडियो देख लेना आप वहा थे और आपने गाडी रुक्वाई फ़िर आप गाडी से उतर कर गाली बकते हूए भागते हूए मारने दौडे थे झूट मत बोलो अहिंसा के पूजारि
— Piyush Agrawal (@PiyushA23256) March 26, 2022
अहिंसावादी साहब, मुझे यह "भोपाल समाचार" पर 15अक्टूवर 2015 का लेख मिला।
— डाॅ0 पञ्कज व्यास (@Pankaj_Krishiv) March 26, 2022
यदि यह सत्य है तो यह किस प्रकार का अहिंसावाद है
यदि यह गलत है तो अभी तक भोपाल समाचार ने इसको हटाया किस कारण नही और आपने इसके विरुध क्या कार्यवाही की?
सुरक्षाकर्मी का काॅलर पकडना भी सम्मान जनक नही हो सकता। pic.twitter.com/nALfRKOT22
अपनी सदैव आम जनता की लड़ाई लड़ी है। बीजेपी सरकार कितना ही प्रयास कर ले आपको नहीं रोक सकती आप जनता की आवाज़ है।
— Tavar Singh Rajput (@tamarsingh1) March 26, 2022