Dindori News: डिंडौरी जिले के बैगा आदिवासी बाहुल्य जीलंग गांव से एक दुख की ख़बर सामने आ रही है। अज्ञात बीमारी के चलते एक ही दिन में मां और बेटे की मौत हो गई। मृतक मां-बेटे विशेष संरक्षित बैगा जनजाति से हैं लिहाजा बीमारी से उनकी मौत के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा गया है।
घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर हर्ष सिंह के निर्देश पर डिंडौरी एसडीएम रामबाबू देवांगन स्वास्थ्य एवं पीएचई विभाग के अधिकारीयों के साथ जीलंग गांव के लिए रवाना हुए। जहां गांव तक सड़क नहीं होने की वजह से अधिकारीयों को गांव तक पहुंचने के लिए ट्रैक्टर से और गांव में अंदर जाने के लिए करीब तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।
दरअसल समनापुर जनपद के गौरा कन्हारी ग्राम पंचायत के पोषक ग्राम जीलंग में दो दिन पहले बैगा जनजाति की महिला सत्तर वर्षीय बजारिन बाई की मौत हो गई एवं दोपहर तीन बजे उनके 45 वर्षीय बेटे ब्रजलाल बैगा की भी मौत हो गई। दोनों मां-बेटे की मौत किसी अज्ञात बीमारी के कारण हुई। मां-बेटे की मौत से गांव वाले दहशत में आ गए।
बताया जा रहा है, कि गांव के ही रहने वाले 4-5 और भी लोग इसी अज्ञात बीमारी से पीड़ित हैं। राहत की बात ये है, कि स्वास्थ्य विभाग की टीम के गांव में पहुंचने के बाद उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाईयां दी गई है।
आपको बता दें की जीलंग गांव में सौ फीसदी विशेष संरक्षित बैगा जनजाति के लोग निवास करते हैं, प्रदेश सरकार ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार की ओर से भी इस विशेष जनजाति को संरक्षित करने के लिए कई योजनाएं चलाई जाती हैं।
घने जंगलों के बीच बसे इस गांव तक पहुंचने के लिए आज भी सड़क तक नहीं बन पाई है। बारिश के मौसम में जीलंग गांव तक पहुंचना असंभव जैसा मालूम होता है ऐसे में वहां के वाशिंदे कैसे जीवनयापन करते होंगे जिसका अंदाजा बड़ी आसानी से लगाया जा सकता है।