भोपाल. पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को पत्र लिखकर कारम डैम में हुए भारी भ्रष्टाचार के लिये दोषी शीर्ष अधिकारियों को निलंबित कर विभागीय जांच कराने की मांग की है। सिंह ने यह भी मांग की कि जांच प्रतिवेदन में दोषी पाए जाने पर उन्हें बर्खास्त भी करें।

पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को संबोधित अपने पत्र में लिखा है कि धार जिले में बने 300 करोड़ के कारम डैम में हुए भ्रष्टाचार पर अभी तक आपने कोई कार्यवाही नहीं कर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का मन बना लिया है।मुख्यमंत्री पद तंज कसते हुए सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि आपके कार्यकाल को भ्रष्टाचारियों का ‘‘स्वर्ण काल’’ माना जा रहा है।

एक सप्ताह बाद भी न किसी पर एफआईआर हुई और न ही गिरफ्तारी हुई है। न ही किसी बड़े अधिकारी को निलंबित किया गया है। ब्लैक लिस्टेड कंपनियों को सैकड़ों करोड़ रूपये का निर्माण कार्य किस आधार पर दिया गया, इस मुद्दे पर भी सरकार की चुप्पी गहरे प्रश्न पैदा करती है।

क्या यही है आपकी जीरो टॉलरेंस की नीति..?

राज्य सरकार ने दिल्ली की ब्लैक लिस्टेड कंपनी को काम देने के साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता को पूर्व में ही संदिग्ध बना दिया था। बाद में कंपनी ने यह काम ग्वालियर की सारथी कंस्ट्रक्शन कंपनी को देकर भारी भ्रष्टाचार किया। ई-टेंडरिंग में आरोपित फर्म राजनैतिक संरक्षण पाकर मनमर्जी करती रही।

कांग्रेस के स्थानीय विधायक पांचीलाल मेड़ा ने समय-समय पर घटिया निर्माण का मुद्दा सरकार के सामने उठाया पर गले-गले तक भ्रष्टाचार में डूबे अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की है। क्या यही है भ्रष्टाचार के प्रति आपकी ज़ीरो टालरेंस नीति? टूट चुके डैम को फोड़कर आपने पानी निकालने का काम कर अपनी पीठ स्वतः से थपथपा ली है, लेकिन उन किसानों की सुध नही ली है जिनके खेत की मिट्टी बह गई है।

आप टकटकी लगाकर घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए है तो आपको यह जानकारी भी होगी कि कारम डेम में रिसाव के कारण वहां के किसानों के खेत में लगी फसल के साथ उपजाऊ मिट्टी तक बह चुकी है और खेतों में पत्थर भी बह कर आ गये है। जिससे उन किसानों को अत्याधिक नुकसान हो चुका है और जमीनें कंकड़ पत्थर में तब्दील हो गई है।

पीड़ित किसानों को मुआवजा कब तक मिलेगा-

सांसद सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि  कारम डैम के आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र के स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कई पीढियों से खेती कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। पानी का बहाव इतना तेज था कि उनके खेत में लगी फसल के साथ मिट्टी भी बह गई। पानी घरों में घुस गया जिससे घर का सारा सामान खराब हो गया है।

सरकार द्वारा सर्वे तो किया जा रहा है परन्तु मुआवजा कब तक दिया जाएगा इसकी कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।ग्रामीणों में सरकार के प्रति भारी आक्रोश है। कोठिदा, भारूड़पुरा, फरसपुरा, सेमलीपुरा सहित कई गांवों में बेहद तबाही हुई है। खेत बहकर अस्तित्वहीन हो गये है। सब कुछ गवां बैठे किसानों और मजदूरों के सामन जीवन यापन पर भी संकट है।