भोपाल: जंगल महकमे में वर्किंग प्लान तैयार करने वाले अफसरों को अनुसंधान एवं विस्तार का अतिरिक्त प्रभार देना असफल साबित होता नजर आने लगा है. वर्किंग प्लान बनाने मैं दिलचस्पी कम ले रहे हैं. इसके कारण समय पर वर्किंग प्लान बन नहीं पा रहा है. अफसरों के इस रवैया से दुखी प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्लान राजेश कुमार ने वन बल प्रमुख आरके गुप्ता को पत्र लिखकर उन्हें हटाने का प्रस्ताव भेजा है.
प्रधान मुख्य वन संरक्षक वर्किंग प्लान राजेश कुमार ने अपने प्रस्ताव में लिखा है कि विभाग में अफसरों की कमी के चलते कार्य योजना तैयार वाले अफसरों को अतिरिक्त प्रभार से हटाया जाए. अपने प्रस्ताव में उल्लेख किया है कि पूर्व में अफसरों की कमी के चलते विभाग ने वर्किंग प्लान बनाने वाले अफसरों को मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान एवं विस्तार अतिरिक्त प्रभार दिया गया था. क्योंकि विभाग में 30 नए आईएफएस अफसरों की आमद हुई है और 17 पर ही खाली हैं. ऐसी स्थिति में वर्किंग प्लान बनाने वाले अफसरों से अनुसंधान एवं विस्तार का अतिरिक्त प्रभार वापस लेकर वरिष्ठ सीएफ एवं डीएफओ दे दिया जाए. अपने प्रस्ताव में पीसीसीएफ कुमार ने साफ तौर पर कहा है कि अतिरिक्त प्रभार मिलने की वजह से सारी वर्किंग प्लान बनाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्किंग प्लान में लेट लाली को लेकर कई अधिकारियों को नोटिस भी जारी किए गए हैं.
इन्हें दिए गए हैं अतिरिक्त प्रभार :
सीसीएफ एसएस उद्दे छिंदवाड़ा कावर की प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी दिए जाने के साथ-साथ सीसीएफ सिवनी का प्रभार दिया गया है. उद्दे अपने मूल काम को अंजाम देने के बजाय मुख्य वन संरक्षक शिवनी का दायित्व निभाने में अधिक दिलचस्पी ले रहे हैं. इसके कारण छिंदवाड़ा का वर्किंग प्लान सफर कर रहा है. इसी प्रकार मुख्य वन संरक्षक राजीव मिश्रा को शहडोल का वर्किंग प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है. इसके साथ ही उन्हें अनुसंधान विस्तार युवा का प्रभार दिया गया है. सीसीएफ एलएल उईके को जबलपुर की वर्किंग प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी देने के साथ ही अनुसंधान एवं विस्तार अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. इसी तरह से टीएस सूलिया और अनिल कुमार सिंह और रमेश गनावा गोभी वर्किंग प्लान के साथ-साथ दूसरी जिम्मेदारी भी दी गई है. सीसीएफ अनिल कुमार सिंह ने अपनी वर्किंग प्लान की फाइनल किताब सौंप दी गई है. जबकि सीसीएफ शहडोल प्रभात कुमार वर्मा को बार-बार नोटिस देने के बाद भी उनका अभी तक वर्किंग प्लान फाइनल नहीं हुआ है.
पहली बार हुआ नया प्रयोग फ्लॉप रहा :
वन मंत्री विजय शाह ने पहली बार वर्किंग प्लान को अधिकारियों में दिलचस्पी जगाने की मंशा से रिक्त पड़े सीसीएफ अनुसंधान एवं विस्तार शाखा का प्रभाव अतिरिक्त रूप से सौंपा गया था. उनका यह प्रयोग असफल रहा, क्योंकि अफसरों ने वर्किंग प्लान में दिलचस्पी जगाने की जगह अतिरिक्त प्रभार वाले दायित्व को निभाने में दिलचस्पी लेने लगे. इसकी वजह भी स्पष्ट नहीं कि अतिरिक्त प्रभार वाले दायित्व में फाइनेंशियल मैनेजमेंट का गेम शामिल रहा. फाइनेंसियल मैनेजमेंट के खेल में इतने रम वह अपने मूल काम को भूलते जा रहे हैं. इसके कारण वर्किंग प्लान में लेट लाली होने लगी है.
इनका कहना :
मैंने प्रस्ताव वन बल प्रमुख को भेजा है. इसकी वजह यह है कि अधिकारी समय पर वर्किंग प्लान तैयार नहीं कर पा रहे हैं. जब यह अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था तब अधिकारियों की क्राइसिस जरूर थी. अब ऐसी स्थिति नहीं है. इसलिए मैंने प्रस्ताव भेजकर अनुसंधान एवं विस्तार शाखा में सीएफ और वरिष्ठ डीएफओ को सपने का सुझाव दिया है. कैडर रिव्यू में भी ऐसा ही प्रस्ताव है.