दीपावली से हल्की सर्दियों का मौसम शुरू हो जाता है। बदलते मौसम में लोगों को सर्दी, जुकाम व बुखार की समस्या का सामना करना पड़ता है। इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है और अन्य मौसमी बीमारियां भी शरीर पर असर डालती हैं। ऐसे में आयुर्वेदिक काढ़ा मौसमी बीमारियों से जल्दी छुटकारा दिलाने के साथ ही शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है। काढ़े का सेवन करने से शरीर पर कोई भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।

मौसम तेजी से बदलने के कारण लोग ज्यादा बीमार पड़ते है। जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। उन्हें बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए ठंड के मौसम में हमेशा शरीर को गर्म रखना चाहिए नहीं तो सर्दी-जुकाम तेजी से उनको अपनी चपेट में ले लेता है।

त्रिकुट चूर्ण के फायदे

इसके सेवन से पेट की गैस, अपच और आव की दिक्कत दूर हो जाती है। खांसी और कफ में यह आपको आराम देता है। दमा के मरीजों के लिए ये किसी रामबाण के जैसे काम करता है। इसके साथ यह बवासीर के मरीजों पर भी कारगर साबित होता है। यह आपकी पाचन शक्ति को बढ़ाता है और शरीर को गर्म रखने में मदद करता है। इसके साथ यह आपकी इम्यूनिटी भी बढ़ाता है। इससे आपको मौसमी संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

ऐसे बनाएं त्रिकुट चूर्ण

यह चूर्ण खरीदने के लिए आपको बाजार में जाने की जरूरत नहीं है। इसे आप घर पर भी आराम से बना सकते हैं। इसे बनाने के लिए सौंठ, पीपल और काली मिर्च की जरूरत पड़ेगी। इन तीनों चीजों को बराबर मात्रा में मिलाकर इसका चूरन बना लें। आप पीपल और काली मिर्च की मात्रा को थोड़ा कम भी रख सकते हैं। इस चूर्ण का सेवन शहद और पानी के साथ करें।

गिलोय का काढ़ा

किसी भी तरह के बुखार में कारगर होता है गिलोय का काढ़ा। गिलोय के करीब एक फुट लंबे तने को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर इसमें नीम की पत्तियों के 5.7 डंठल, 8-10 तुलसी की पत्तियां और करीब 20 ग्राम काला गुड़ के साथ एक गिलास पानी में खौलाकर कर सेवन करें।