नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की पूर्व एमडी चित्रा रामकृष्णन को प्रवर्तन निदेशालय (ED ) ने गिरफ्तार कर लिया। चित्रा पर अवैध रूप से फोन टैपिंग करने का आरोप है। दिल्ली की एक अदालत ने ईडी को रामकृष्णन से चार दिन की हिरासत में पूछताछ की अनुमति दी है। ईडी का मामला CBI  की ओर से दर्ज FIR पर आधारित है। कई वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट इस मामले में सीबीआई और ईडी की जांच के दायरे में आ गए हैं। इनमें चित्रा रामकृष्ण, रवि नारायण और मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त शामिल हैं।

यह मामला तब उजागर हुआ जब सीबीआई संजय पांडे से जुड़ी एक फर्म को दिए गए ठेके और कुछ लोगों की जासूसी करने के संबंध में जांच कर रही थी, तब इसमें चित्रा के भी शामिल होने का पता चला, सूत्रों के अनुसार सीबीआई को कुछ ऐसे सबूत मिले हैं जिनमें संजय पांडे की ओर से अवैध जासूसी का सुझाव दिया गया।

अपनी जांच के दौरान, सीबीआई को संजय पांडे के सहयोग से चल रही एक कंपनी की भुगतान रसीदें, रिकॉर्डिंग की गई आवाज़ के नमूने,  रिकॉर्डिंग के मूल टेप और सर्वर के साथ-साथ संजय पांडे से जुड़ी एक फर्म iSec सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के कैंपस से दो लैपटॉप भी बरामद किए गए। इनमें चार एमटीएनएल लाइनों पर फोन टैपिंग के सबूत हैं। हर एक लाइन में एक बार में 30 कॉल को एडजस्ट किया जा सकता है।

सूत्रों ने बताया कि संजय पांडे समर्थित कंपनी iSec सर्विसेस को अनुबंध राशि के रूप में तकरीबन 4.45 करोड़ रुपये मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक, एनएसई के पूर्व प्रमुख चित्रा रामकृष्णन और रवि नारायण ने एनएसई के कर्मचारियों की अवैध रूप से जासूसी करने के लिए एक निजी फर्म में काम किया। सीबीआई को संदेह है कि दोनों यह पता लगाना चाहते थे कि क्या कर्मचारी क्या चर्चा कर रहे थे या एक्सचेंज से संबंधित जानकारी लीक कर रहे थे।