भोपाल,
मप्र पुलिस की सफलताओं के तमाम दावों के बीच कुछ ऐसा घटनाक्रम आ जाता है कि उस पर सवाल उठने लगते हैं। हाल में खरगोन में भड़के दंगे के बाद अब मप्र पुलिस को अपने मुखबिर तंत्र को मजबूत करने की चिंता सता रही है। वजह यह भी है कि भोपाल आये केंद्रीय मंत्री अमित शाह भी यह सलाह दे चुके हैं। इसके बाद मप्र पुलिस की स्पेशल ब्रांच (एसबी) में खाली पदों को भरने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए बाकायदा एक परिपत्र जारी किया गया है। इसमें खाली पदों को डेपुटेशन से भरने के इच्छुक अधिकारी- कर्मचारियों के नाम मांगे गए हैं। डेपुटेशन रूल्स के साथ साथ इसमें उर्दू, गोंडी, मराठी, छत्तीसगढ़ी भाषा या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों में दक्षता वालों को तवज्जो दी जाएगी।
जानकारी के मुताबिक इस काम में इच्छुकों को इंटेलिजेंस की बेसिक ट्रेनिंग पूरी करने, कम से कम पांच साल की सेवा पूरी होने, किसी अन्य इकाई में पहले डेपुटेशन पर न रहने तथा यदि डेपुटेशन पर रहे तो वापसी के बाद मूल इकाई में तीन साल पूरे कर लिए होने की शर्त है। बताया जाता है कि गत सप्ताह जारी पत्र सभी रेंज आईजी एडीजी समेत इंटेलिजेंस के सभी अफसरों को भेजा है। इसमें लिखा है कि, चूंकि एसबी द्वारा प्रदेश की कानून व्यवस्था व इंटरनल सिक्योरिटी बनाए रखने का काम किया जाता है। एसबी मुख्यालय व फील्ड इकाइयों में खाली पदों को डेपुटेशन से भरना है।
तीस फीसद पद हैं खाली
बताया जाता है कि एसबी में बड़े शहरों की फील्ड इकाइयों में 10 फीसद और छोटे जिलों में 20 से 30 प्रतिशत पद खाली हैं। खाली पदों को भरने में उर्दू, गोंडी, मराठी मजबूत हो छत्तीसगढ़ी या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं- बोलियों में दक्षता वालों को तवज्जो इसलिये दी गई है। क्योंकि, एसबी को गोपनीय सूचनाएं जुटाने के लिए ऐसे लोगों के बीच भी जाना पड़ता है। वहां यदि क्षेत्रीय भाषाओं की समझ हो तो काम आसान हो जाता है। मप्र में नक्सली अक्सर आपसी बातचीत छत्तीसगढ़ी, गोंडी या क्षेत्रीय भाषा में करते हैं। ऐसे ही आतंकी अपनी बातें कोडवर्ड में उर्दू या कुछ फारसी शब्दों के इस्तेमाल के साथ करते हैं।
शाह ने कहा था
दरअसल 22 अप्रैल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सेंट्रल एकेडमी फॉर पुलिस ट्रेनिंग में 48वीं ऑल इंडिया पुलिस साइंस कांग्रेस का शुभारंभ करने जब आये थे तो उन्होंने बैक टू बेसिक पुलिसिंग में जाने की बात कही थी और खबरी प्रणाली को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया था उन्होंने तल्ख अंदाज में कहा कि मैं पुनर्जीवित सोच-समझ कर बोल रहा हूं।