भोपाल। राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त को परिवार पेंशन की पात्रता प्रदान कर दी है। इसके लिये सामान्य प्रशासन विभाग ने चालीस साल पहले बनाये गये मप्र लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त सेवा की शर्तें नियम 1982 में बदलाव कर दिया है। पहले नियमों में इसका प्रावधान नहीं था।
ज्ञातव्य है कि परिवार पेंशन मृत्यु के पश्चात देय होती है। उक्त नियमों में लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त को रिटायरमेंट के बाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायाधीश की तरह पेंशन दिये जाने का तो प्रावधान है परन्तु परिवार पेंशन का प्रावधान नहीं था। अब यह प्रावधान करने से पहले रिटायर हुये लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्तों को मृत्यु होने के बाद उनके परिवार को पेंशन स्वीकृत की जा सकेगी।
दो नये विभागों का गठन हुआ :
सामान्य प्रशासन विभाग ने अध्यात्म विभाग का नाम बदलकर धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग कर दिया है तथा आनंद विभाग का भी गठन किया है। इसके लिये कार्य आवंटन नियमों में बदलाव कर दिया गया है। आनंद विभाग के नीति संबंधी विषयों में यह भी शामिल किया गया है कि आनंद और सकुशलता मापने के पैमानों की पहचान करना तथा उन्हें परिभाषित करना तथा निरंतर अंतराल पर मापदण्डों पर राज्य के नागरिकों की मन:स्थिति का आंकलन करना।