भोपाल: मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने बुरहानपुर में अतिक्रमणकरियों को रोकने के लिए कलेक्टर और एसपी को सख्त निर्देश दिए हैं. मुख्य सचिव ने अपने निर्देश में कहा है कि फॉरेस्ट अफसरों के साथ मिलकर कलेक्टर और एसपी को अतिक्रमण माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे. वन विभाग ने बुरहानपुर वन मंडल में पदस्थ प्रमोटी डीएफओ गिरजेश बरकड़े की जगह 2018 बैच के सेंधवा डीएफओ अनुपम शर्मा को पदस्थ किया है.

बुरहानपुर जंगलों में सक्रिय अतिक्रमण माफिया से निपटने के लिए मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने सोमवार को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. इस बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह डॉ राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव वन जेएन कंसोटिया, महानिदेशक पुलिस और वन बल प्रमुख आरके गुप्ता सहित भाई अधिकारी उपस्थित थे.
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मुख्य सचिव ने फॉरेस्ट अफसरों से बुरहानपुर में बढ़ते अतिक्रमण को लेकर वस्तुस्थिति जानी. इसके बाद कलेक्टर भाव्या मैथिल और एसपी राहुल सिंह लोढ़ा को फॉरेस्ट अफसरों के साथ मिलकर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए. यहां यह उल्लेख करना भी उचित होगा कि कलेक्टर बुरहानपुर मैथिल पूर्व में कह चुकी है कि अतिक्रमणकारियों के भय से स्थानीय आदिवासियों का पलायन होने लगा है.
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इन रेंजों में सक्रिय है माफिया-
बुरहानपुर वन मंडल के असीरगढ़, धूलकोट, नेपानगर, नावरा, बुरहानपुर, खकनार, शाहपुर और बोदरली रेंज में अतिक्रमण माफिया सैकड़ों की तादाद में सक्रिय है. लगातार जंगलों की कटाई कर अतिक्रमण कर रहे हैं. इन्हें रोकने और सामना करने में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और निहत्था वन विभाग का मैदानी अमला अक्षम साबित हो रहें है. यही वजह है कि वन विभाग ने 5 जिलों में तैनात अपने एसएएफ के बटालियन के 40 जवानों को बुरहानपुर में तैनाती की जा रही है.
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17,000 हेक्टेयर वन भूमि पट्टे में बंट गई-
बुरहानपुर जिले में कुल 1लाख 90 हजार 100 हेक्टेयर जंगल है. 17000 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रामकों को पट्टे के रूप में बांट दी गई है. यहां तक कि तत्कालीन कलेक्टर ने कुछ अपात्र लोगों को भी पट्टे दे दिए हैं. इन पदों को लेकर वन विभाग में आपत्ति भी जताई थी परंतु उसे खारिज कर दिया गया. अपात्र लोगों को मिले पट्टे के कारण अतिक्रमणकारियों ने वन भूमि पर कब्जा करने की मुहिम और तेज कर दी. सूत्रों की मानें तो कानपुर में करीब 58000 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र पर अतिक्रमण माफिया ने कब्जा कर लिया है. अतिक्रमणकारियों को माधुरी बेन जैसे कथित सोशल वर्कर का समर्थन प्राप्त है. इन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है.

फिर तो सीसीएफ को भी हटा देना चाहिए-
वन विभाग ने प्रमोटी डीएफओ गिरजेश बरकडे को बुरहानपुर से स्थानांतरण कर सेंधवा पदस्थ किया है. वरकड़े की पोस्टिंग के अभी एक महीने भी नहीं हो पाए थे कि उन्हें हटाकर उनके ऊपर इनकॉम्पिटेन्ट टैग लगा दिया गया.मई में बरकडे रिटायर भी हो रहे हैं. जबकि मुख्य वन संरक्षक खंडवा आरपी राय डेढ़ वर्षो से सदस्य हैं.

उन्होंने कभी भी अतिक्रमणकारियों को रोकने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई. न ही वे बुरहानपुर में पिट रहे मैदानी अमले का मनोबल बढ़ाने के लिए उनके बीच पहुंचे. जिस मापदंड के तहत डीएफओ को हटाया उसी मानदंड से तो सीसीएफ राय को भी हटा देना चाहिए.
इसके पहले जेपी शर्मा बीके मिश्रा मनोज अग्रवाल जैसे फॉरेस्ट प्रोटेक्टेड अफसर खंडवा सीसीएफ थे तब इन्होंने अपनी रणनीति के तहत अतिक्रमण माफियाओं के खिलाफ स्थानीय आदिवासियों से मिलकर मुहिम चलाई थी. राय के संदर्भ में पूरे विभाग के आला अफसरों का मानना है कि वे सिर्फ वन मंत्री विजय शाह गणेश परिक्रमा में लगे हुए हैं. उनके सर्किल में जंगल काट रहे हैं. अतिक्रमण बढ़ रहे हैं. इस पर राय की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है.