दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक फर्जी दुष्कर्म के मामले में एक अनोखी सज़ा देने का फैसला सुनाया। दुष्कर्म का फर्जी मामला दर्ज कराने वाली एक महिला को एक नेत्रहीन स्कूल में समाज सेवा करने का आदेश दिया गया। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म की शिकायत में आरोपों को राजीनामा के उलट पाया गया इसके बाद अदालत ने इसे अनुचित और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करार देते हुए महिला को ये सज़ा सुनाई है।
महिला की शिकायत की FIR में ये कहा गया था कि कथित आरोपी ने उसे कोल्ड ड्रिंक पिलाई और पीने के बाद वो बेहोश हो गई और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। हालांकि राजीनामा में, महिला ने ये स्वीकार किया कि आरोपी व्यक्ति ने कभी भी उसकी इच्छा के विरुद्ध उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित नहीं किए थे। मामले में ये भी पता चला है कि महिला का आरोपी के साथ पैसों को लेकर विवाद चल रहा था, जिसके कारण वो परेशान थी और कुछ लोगों की गलत सलाह मानकर वह गुमराह हो गई और उसने उस व्यक्ति के ख़िलाफ़ FIR कर दी थी।
राजीनामा के हिसाब से दोनों पक्षों ने मामले को बिना किसी दबाव के आपस में ही सुलझा लिया है। दरअसल आरोपी ने राजीनामा होने के बाद अदालत से FIR रद्द करने की मांग को लेकर अदालत का रुख़ किया था। अदालत ने कहा कि FIR और राजीनामा में लिखे आरोप पूरी तरह से विपरीत हैं और उनका मानना है कि महिला का आचरण बहुत अनुचित है, कुल मिलाकर यह न्यायप्रक्रिया का दुरुपयोग है।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने हाल के आदेश में कहा कि महिला का कहना है कि वह मानसिक अवसाद से गुजर रही है, ये ध्यान नें रखते हुए कि महिला के 3 छोटे-छोटे बच्चे हैं, जिनकी उम्र 12 वर्ष से कम है। इसी के चलते अदालत ने महिला को कोई सख़्त सज़ा नहीं सुनाई।
एसके बाद महिला ने FIR वापस ले ली है, सज़ा के अनुसार महिला को अखिल भारतीय नेत्रहीन परिसंघ रोहिणी में दो महीने तक हफ्ते के 5 दिन, रोज 3 घंटे के लिए सोशल वर्क करने का आदेश दिया गया है। मामले में महिला को रोहिणी क्षेत्र में 50 पौधे लगाने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने कहा कि प्रत्येक पेड़ का नर्सरी जीवन 3 साल का होगा और याचिकाकर्ता इन पेड़ों की 5 साल तक देखभाल करेंगे।