भोपाल। राज्य का वन विभाग जंगलों की सुरक्षा के लिये पांच करोड़ रुपये के वायरलैस सेट खरीदने जा रहा है। ये सेट डिजिटल होंगे। करीब डेढ़ हजार वायरलैस उपकरणों की खरीदी होगी।
उल्लेखनीय है कि 18 साल पहले भी पुलिस की तरह वन विभाग ने वायरलैस सेट खरीदे थे। परन्तु उसने केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग से लायसेंस नहीं लिया था जबकि नियमानुसार लायसेंस लेना जरुरी होता है। वर्ष 2012 में तो कलकत्ता की एक कंपनी से 70 लाख रुपये के नये वायरलैस सेट क्रय कर लिये गये थे तथा जब लायसेंस का मामला सामने आया तो बमुश्किल उक्त कंपनी से राशि वापस लेनी पड़ी थी। दूरसंचार विभाग ने करीब चौदह करोड़ रुपये का बकाया लायसेंस शुल्क निकाल दिया था जो अभी भी निपटा नहीं है। राज्य एवं केंद्र के बीच इस संबंध में वन टाईम सेटलमेंट का पत्राचार चल रहा है।
फिलहाल केंद्र सरकार ने नये डिजिटल वायरलैस सेट खरीदने का लायसेंस राज्य के वन विभाग को दे दिया है जिसके लिये करीब 81 लाख रुपये फीस अदा की गई है। कान्हा टाईगर रिजर्व को इन वायरलैस सेट की खरीदी का काम दिया गया है जिसने टेण्डर जारी कर दिये हैं। यह पांच करोड़ रुपये कैम्पा से मिले हैं जिन्हें अगले ढाई माह में ही खरीदने हैं क्योंकि वर्तमान वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2022 को खत्म हो जायेगा।
नये खरीदे जा रहे डिजिटल वायरलैस सेट का उपयोग टाईगर रिजर्व एवं अन्य वन्यप्राणी अभ्यारण्यों में किया जायेगा। अगले वित्त वर्ष के लिये पूरे महकमे के लिये वायरलैस सेट खरीदने का प्रस्ताव भारत सरकार कों कैम्पा फाण्ड से स्वीकृत करने का प्रस्ताव भेजा गया है जोकि करीब 23 करोड़ रुपयों का है।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि जंगलों की सुरक्षा के लिये डिजिटल वायरलैस सेट खरीदने के लिये कैम्पा फण्ड से पांच करोड़ रुपये दिये हैं तथा अगले वित्त वर्ष के लिये 23 करोड़ रुपयों का प्रस्ताव तैयार किया गया है।