भोपाल. जंगल महकमे में संभवतः ऐसा पहली बार हुआ, जब किसी डीएफओ के तबादले को रुकवाने के लिए वन कर्मचारियों एवं ग्रामीणों ने एक साथ प्रदर्शन किया है. बुरहानपुर में अतिक्रमण माफिया और टिंबर माफिया पर नकेल कसने वाले डीएफओ अनुपम शर्मा कि अचानक तबादले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और वन कर्मचारियों में असंतोष है. 

गुरुवार को बड़ी संख्या में वन कर्मचारियों और वन सुरक्षा समिति के सदस्यों ने एक साथ रैली निकालकर अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में वन कर्मचारियों एवं ग्रामीण सुरक्षा समितियों ने शासन को चेतावनी दी है कि यदि 15 दिन में तबादला निरस्त नहीं किया तो अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा.

बुरहानपुर वन कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष सचिन हंबीर के नेतृत्व में सैकड़ों वन कर्मचारियों एवं सुरक्षा समितियों के सदस्यों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय तक रैली निकाल कर अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में कहा गया है कि डीएफओ अनुपम शर्मा का तबादला भोपाल करने से वन सुरक्षा समिति सदस्यों, वन कर्मियों और ग्रामीणों में आक्रोश है. ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि डीएफओ अनुपम शर्मा ने काम करके दिखा दिया कि अतिक्रमणकारियों को भगाया जा सकता है, बशर्ते शासन और प्रशासन में इच्छाशक्ति प्रबल हो. 

अचानक डीएफओ शर्मा के तबादला करना मनोबल को गिराने वाली बात है. ऐसे में तो कोई भी अतिक्रमण माफिया और अन्य माफियाओं से नहीं लड़ सकता. ज्ञापन में कहा गया है कि अतिक्रमणकारियों से बुरहानपुर के सैकड़ों हेक्टेयर वन भूमि को छुड़ाने और करोड़ों की लकड़ी जब्त करने में अहम भूमिका निभाने वाले डीएफओ अनुपम शर्मा को महज 2 महीने में तबादला कर दिया गया. ज्ञापन में कहा गया है कि ऐसा लगता है कि शासन ने अनुपम शर्मा का तबादला कर अतिक्रमणकारियों के मनोबल को बढ़ाने का काम किया है. 

जंगल में उगाई जाने वाली उपज वनोपज होगी

डीएफओ अनुपम शर्मा ने जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को आईना दिखाते हुए 17 अप्रैल को एक आदेश जारी कर एक आदेश की कॉपी कलेक्टर को भेजी. इस आदेश के तहत भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 2 (4) (ख) (ii) के अनुसार अगर कोई अतिक्रमण कारी बनो को अवैध कटाई अथवा सफाई करके कोई फसल वन भूमि पर उगाता है तो उस फसल को भी भारतीय वन अधिनियम के अंतर्गत वन उपज माना जाएगा. जब कोई व्यक्ति किसी वन उपज को नुकसान पहुंचाएगा तो भारतीय वन अधिनियम 1972 की धारा 26 (1) (च) और यदि कोई व्यक्ति किसी वनोपज को हटाएगा अथवा उसका परिवहन करेगा तो उसे भारतीय वन अधिनियम 26 (1) (छ) दंडनीय अपराध है. इसके अलावा अगर किसी वाहन ( ट्रक-ट्रैक्टर) आप लोग अधिक्रमित वन भूमि से फसल की उपज हटाने व परिवहन करने के लिए होता है तो उसे भारतीय वन अधिनियम की धारा 52 अंतर्गत जब्त कर राजसात किया जा सकता है.