भोपाल: ग्वालियर की बेशकीमती वन भूमि पर पूर्व अपर वन मुख्य सचिव प्रशांत मेहता की पत्नी ममता मेहता 0.210 हेक्टेयर वन भूमि पर काबिज है. राजस्व विभाग और वन विभाग के संयुक्त कमेटी द्वारा 1 राजस्व भूमि के निराकरण के लिए दो मर्तबा संयुक्त कार्रवाई की गई.

तमाम दबाव के बावजूद भी वन भूमि की नियत परिवर्तित नहीं कर सके. दिलचस्प पहलू यह है कि जिस भी फॉरेस्ट अधिकारी ने इस मुद्दे को उछाला उसका ग्वालियर से तबादला कर दिया गया. जंगलात कानून के अंतर्गत रिजर्व फॉरेस्ट सीमा के 3 मील की दूरी पर समस्त दखल रहित जमीने प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट होंगी. इंडियन फॉरेस्ट एक्ट के अंतर्गत जंगलात कानून को अडॉप्ट किया गया.
वर्ष 2005 में ग्वालियर के वन खंड ओहदपुर कि चारों और चैन लिंक फेंसिंग से घेराव करने के दौरान भूमि स्वामित्व को लेकर विभिन्न प्रकार के विवाद उत्पन्न हुए. तमाम रसूखदार नेताओं और नौकरशाहों ने वन भूमि को अपने स्वामित्व का दावा किया.
जंगलात कानून के तहत जब तत्कालीन डीएफओ भागवत सिंह ने भूमि को दखल रहित के लिए संबंधितों को नोटिस जारी किया तब उनका तत्काल ट्रांसफर कर दिया गया. भागवत सिंह के तबादले के बाद किसी दूसरे आईएफएस अफसरों ने इस विवाद को नास्तीबद्ध कर दिया.
यहां तक कि तमाम जतन करने के बाद नौकरशाह प्रशांत मेहता अपर मुख्य सचिव वन के पद पर आसीन हुए तब भी वे वन भूमि की नोईयत को परिवर्तित नहीं करा सके.
संयुक्त सीमांकन के बाद भी बनी है यथास्थिति-
वन भूमि पर का बीज रसूखदारों के दबाव में 30 अप्रैल 2005 और 16 मार्च 2011 को राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा संयुक्त रूप से वन मानचित्रों का मिलान कर राजस्व पटवारी मानचित्र पर वन सीमा लाइन की गई. इसपर राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियों के द्वारा संयुक्त हस्ताक्षर किए गए.
22 जुलाई 2019 में एक बार फिर फॉरेस्टर अफसरों पर दबाव बनाया गया कि वन भूमि का सर्वे क्रमांक 109/2 रकबा 0.210 हेक्टेयर वन भूमि की नोईयत परिवर्तित करने का प्रयास किया जाये. 28 जुलाई 19 को संयुक्त रुप से सीमांकन उपरांत नक्शे पर पूर्व से पटवारी नक्शे पर डाली गई लाइन का मिलान किया गया. तब भी पूर्व एसीएस की पत्नी कि कब्जे वाली जमीन वन भूमि के अंतर्गत ही पाई गई. इसका प्रतिवेदन भी 31 जुलाई 19 को कलेक्टर ग्वालियर को भेजा गया.
वन मंत्री को रिपोर्ट देते ही मलिक का हुआ तबादला-
सूत्रों की माने तो प्रशांत मेहता प्रकरण में वन मंत्री विजय शाह के सचिव ने प्रतिवेदन मांगा. तत्कालीन अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक शशि मलिक ने ग्वालियर डीएफओ के प्रतिवेदन आधार पर अपनी रिपोर्ट वन मंत्री को भेजी. रिपोर्ट भेजने के कुछ ही महीने के अंदर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मलिक का तबादला पदेन सिर्फ ग्वालियर के पद से भोपाल पीसीसीएफ मुख्यालय कर दिया गया.