दोस्ती, ब्रेकअप, और साजिश..! इन तीन शब्दों ने एक मासूम लड़की की जिंदगी को लगभग पूरी तरह से तबाह कर दिया. वैसे तो उगता हुआ सूरज नई उम्मीद का प्रतीक होता है. पर इस मासूम को क्या पता था कि सिर्फ़ एक दिन में ही उसकी सारी उम्मीदे ढलते हुए सूरज की तरह सिमट कर रह जाएगी.
दिन था बुधवार, तारीख 14 दिसंबर 2022, समय सुबह करीब 9 बजे राजधानी दिल्ली में 17 वर्ष की लड़की अपनी छोटी बहन के साथ स्कूल जानें के लिए मोहन गार्डन के पास खड़ी थी. तभी अचानक इंसानियत का चौला ओढ़े बाइक पर सवार दो हैवान सामने की तरफ से आये और छात्रा के चेहरे पर एसिड फ़ेक फ़रार हो गए थे.
दर्द से तड़प रहीं छात्रा की हालत देख साथ में मौजूद छोड़ी बहन ने पहले घर वालों को बुलाया. फिर घर वाले घटनास्थल पर पहुंचे और पुलिस को फ़ोन किया लेकिन हेल्पलाइन नंबर चेंज होने कारण कॉल नहीं लगा था. उसके बाद छात्रा (बेटी) को सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल में दिल्ली पुलिस की टीम भी पहुंची. पुलिस के मुताबिक, छात्रा 12वी क्लास की स्टूडेंट है.
पुलिस ने CCTV फुटेज और बयानों के ज़रिये पहले ही दिन मुख्य आरोपी सचिन अरोड़ा सहित उसके दो दोस्तों हर्षित अग्रवाल और वीरेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया. स्पेशल पुलिस कमिश्नर सागर प्रीत हुड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि आरोपियों ने ऑनलाइन Flipkart के ज़रिये एसिड खरीदा था.
दरअसल, मुख्य आरोपी सचिन अरोड़ा और पीड़िता (लड़की) दोनों दोस्त थे. उनकी दोस्ती सितंबर तक चली और फिर ब्रेकअप के बाद दोनों के रास्ते अलग-अलग हो गए. लेकिन इससे नाराज प्रेमी सचिन ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर बीच सड़क लड़की के चेहरे पर तेजाब फ़ेक दिया. आरोपी लड़की के पड़ोस में ही रहता है.
दोस्तों के साथ मिलकर रची थी साजिश-
पुलिस को आरोपियों ने बताया कि ब्रेकअप होने के बाद तीन महीने तक इस घटना को अंजाम देने के लिए तीनों दोस्तों ने मिलकर साजिश रची थी. फिर बुधवार के दिन जब लड़की स्कूल जा रहीं थी तभी साजिश के तहत सचिन और हर्षित बाइक पर आए और छात्रा पर तेजाब फेक दिया.
इस दौरान तीसरा आरोपी वीरेंद्र दोनों बाइक सवार आरोपियों के मोबाइल और स्कूटी लेकर दूसरी लोकेशन पर जाकर खड़ा हो गया, ताकि जांच के दौरान पुलिस को गुमराह किया जा सके. साथ ही पुलिस को घटनास्थल का कोई सबूत न मिले. अब तीनों ही आरोपी सलाखों के पीछे हैं.
8 प्रतिशत जला चेहरा, आंखों पर भी पड़ा प्रभाव-
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एसिड अटैक से लड़की का चेहरा 8 प्रतिशत जल गया, इसके साथ ही उसकी आंखों पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है. प्रारंभिक जांच से पता चला है कि इस हमले में नाइट्रिक एसिड का इस्तेमाल किया गया था. अब फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही सब कुछ क्लियर हो पायेगा.
लड़की की मां और परिवार वालों ने टपकते आंसुओं से साथ बताया कि हम उसका चेहरा भी नहीं देख पा रहे हैं. वह अपनी आंखें तक नहीं खोल पा रही है. वह काफी दर्द में है. इस दर्द भरी दास्तां को सुन हर कोई सहम गया क्योंकि इसी दिल्ली में एक लड़की के 35 टुकड़े कर जंगलों में फेक दिए गए थे. जी हाँ..! उसी चर्चित श्रद्धा मर्डर केस का अभी पूरी तरह से ख़ुलासा भी नहीं हुआ था कि बीच सड़क मासूम लड़की पर हैवानों ने एसिड अटेक कर कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दी हैं.
सवालों के घेरे में शासन-प्रशासन?
दिल्ली में बीच सड़क दिन दहाडे लड़की पर एसिड अटैक होना पुलिस प्रशासन और सरकारों पर कई सवाल खड़े कर रहा है. क्योंकि सख्त कानून के बावजूद भी एसिड बड़ी ही आसानी से ऑनलाइन और ऑफलाइन हर जगह मिल रहा हैं. अगर शहरों की ये हालत है तो फिर ग्रामीण अंचलों में अपराध किस स्तर पर होगा. इसकी कल्पना मात्र से ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं.
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