घरेलू उड़ानों के लिए हवाई किराया तय करने का अधिकार 31 अगस्त से एयरलाइन्स कम्पनियों को मिल गया है। पिछले 27 महीने से सरकार ने एयर फेयर पर अपर और लोअर लिमिट की जो सीमा लगा रखी थी वह खत्म हो गई है। अब दुबारा एयरलाइन्स अपने हवाई किराये को तय कर सकती हैं जैसे कोरोना काल से पहले करती थी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इसी महीने के दूसरे हफ्ते में कहा था कि घरेलू हवाई ऑपरेशन और यात्रियों के मांग की स्टेटस की बाद हमने घरेलू यात्रा के लिए एयर बैंड फेयर को 31 अगस्त से  खत्म करने का फैसला किया है।

लॉकडाउन के चलते देश में बंद थी हवाई सेवा 

जब देश में मार्च 2020 कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन लगाया गया था, तब हवाई और रेल सेवाएं भी  बंद हो गई थी। 25 मई 2020 से देश में 33 फीसदी उड़ानों’ के साथ एयरलाइन्स को उड़ान भारने की अनुमति देने के साथ ही एयर बैंड फेयर को लागू किया था और इसी के साथ हवाई किराये में अपर और लोअर लिमिट लगाने की शुरुआत हुई। एयर बैंड फेयर में लोअर बैंड को एयरलाइन्स  को प्रोटेक्ट करने के लिए वहीँ अपर बैंड हवा यात्रियों की सुविधा के लिए लागू किया था, जिसमे 40 मिनट के हवाई सफ़र के लिए एयरलाइन्स 2900 रुपए से कम और 8800 रुपए से ज्यादा चार्ज नही ले सकती थी लेकिन अब कोरोना के खत्म होते ही सरकार से 27 महीने बाद इस एयर बैंड फेयर को खत्म कर दिया है।


दामो में हुआ था इजाफा

केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि घरेलू उड़ानों से एयर फेयर पर तय सीमा को  हटाने का फैसला हवाई फ्यूल की कीमतें और उसकी रोजाना मांग की समीक्षा के बाद लिया है और हमें उम्मीद है की इस एयर फेयर पर तय सीमा के हटने के बाद भी घरेलु एयर ट्रैफिक में बढोतरी देखने को मिलेगी। दरअसल रूस-यूक्रेन युद्ध और कई अन्य कारणों  के चलते कच्चे तेल के दामो में रिकॉर्ड स्तर का इजाफा हुआ था, जिसके बाद हवाई फ्यूल के दामो में भी बढ़ोतरी हुई थी। इन बढे हुए दामो का असर  एयरलाइन्स कंपनियों की वित्तीय सेहत पर भी पड़ा था लेकिन वह एयर बैंड फेयर के चलते अपने टिकट के दामो में इजाफा नही कर सकी थीं।