इन दिनों सोशल मीडिया बड़े ही ग़जब तरीके से काम कर रहा है. वैसे तो जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए कई सरकारी योजनाएं काम कर रही है. लेकिन कहते है न की जब तक समस्या 'आम' न हो तब तक 'आम आदमी' का काम होता नहीं हैं. 

आम आदमी दम तोड़ती सरकारी कार्यालयों की व्यवस्था के चक्कर काट-काटकर थक जाने के बाद अपनी समस्याओं को सरकार की दहलीज तक ले जाने के लिए इसी सोशल मीडिया का सहारा लेना उचित समझने लगा है क्योंकि सरकार से सीधे समस्या साझा करने से पहले उसे सरकारी लाठी-डंडों से गुजरना पड़ता है. कई बार तो उसे तमाम मशक्कत के बाद भी निराश होकर ही लौटना पड़ता है. 

अधिकारियों की लापरवाही से परेशान होकर एक बुजुर्ग ने भी अपनी समस्या 'आम' करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया. जानकारी के अनुसार, 102 वर्षीय बुजुर्ग का नाम दुलीचंद है, जो हरियाणा के रोहतक ज़िले के गांव गांधरा के निवासी है. लापरवाही की सारी हदें पार कर अधिकारियों ने उन्हें मृत घोषित करते हुए उनकी वृद्धा पेंशन बंद कर दी. इसके बाद बुजुर्ग बैंड-बाजे के साथ सरकार को जगाने के लिए घर से निकल पड़ा. उनका यह अंदाज सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा हैं.

फ़िलहाल बुजुर्ग हरियाणा सरकार की दम तोड़ती सरकारी व्यवस्था की एक तस्वीर लिए सड़कों से लेकर सरकारी कार्यालयों तक में भटक रहा हैं. वायरल तस्वीर में बुजुर्ग हाथ में तख्ती लिए नजर आ रहा है जिसमें लिखा है- “सरकार, थारा फूफा अभी जिंदा है”.

बुढ़ापे की समस्या के बीच बुजुर्ग के लिए अपनी बंद पेंशन को चालू कराना मतलब सोये हुए सरकारी तंत्र को जगाने जैसा है. बुजुर्ग को सहारा देने के लिए AAP नेता नवीन जयहिंद ने उनका हाथ थामा और प्रेस कांफ्रेंस कर सीएम मनोहर लाल खट्टर से 24 घंटे में समस्या का निवारण करने को कहा गया हैं.

सोशल मीडिया पर समस्याओं का वायरल होना तो आम बात है लेकिन क्या सरकारी तंत्र इन समस्याओं को गंभीरता से लेकर इनके निवारण के लिए तेज़ी से कोई काम करता है या नहीं..! यह अब एक बड़ा सवाल बन गया है?