भोपाल. भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक ( कैग ) के प्रतिवेदनों को शासकीय विभाग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. इसका खुलासा भी कैग ने अपने ताजे प्रतिवेदन में किया है. यह प्रतिवेदन बीते विधानसभा सत्र में सदन के पटल पर रखा गया है. कैग अपने प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि 17 विभाग प्रतिवेदन की कंडिकाओं को गंभीरता से नहीं लेते और न ही समय-सीमा में उत्तर देते हैं. केट ने अपने प्रतिवेदन में साफ तौर पर कहा है कि लेखा परीक्षा कणिकाओं पर कार्रवाई के अभाव में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के जारी होने का खतरा है.
विधानसभा सत्र में सदन के पटल पर रखे गए वर्ष 2021 के भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक का प्रतिवेदन क्रमांक-1 रिपोर्ट में गंभीरजनक टिप्पणी की गई है. प्रतिवेदन में कहा गया है कि 16 विभागों से संबंधित 1492 निरीक्षण प्रतिवेदन और 10457 कंडिकाओं पर कार्रवाई के अभाव में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के जारी रहने का खतरा होता है. इसके परिणाम स्वरूप शासकीय प्रक्रिया में अतिरिक्त नियंत्रणों का कमजोर होना, सार्वजनिक वस्तुओं एवं सेवाओं का आप कुशल एवं प्रभारी वितरण, धोखाधड़ी भ्रष्टाचार और राजकोष को नुकसान भी हो सकता है.
31 मार्च 2020 की स्थिति में लंबित कंडिका आएं
कैग के प्रतिवेदन में उल्लेख कंडिका ऊपर शासकीय विभाग कितनी गंभीर है इसकी बानगी इस प्रकार है-
अवधि लंबित कंडीकाएं
2019-20 1890
2018-19 2582
2017-18 3539
2016-17 3020
1से 3 वर्ष 8063
3 से 5 वर्ष 3909
5 वर्ष से अधिक 9612
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*कैग की रिपोर्ट पर शासन की प्रतिक्रिया*
राज्य शासन ने सभी विभागों से अपेक्षा की है कि कैग कि कंडिकाओं का उत्तर 6 सप्ताह के अंदर भेजें. इसके लिए विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव को ताकीद किया गया है. इसके बावजूद इस प्रतिवेदन को अंतिम रूप देने की तिथि तक जल संसाधन विभाग की चार प्रारूप कणिकाओं के उत्तर प्राप्त नहीं हुए हैं.
*ये है 16 विभाग, जो नहीं है गंभीर*
लोक निर्माण
जल संसाधन
किसान कल्याण एवं कृषि
वन
नर्मदा घाटी विकास
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय
महिला एवं बाल विकास
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
आदिम जाति कल्याण विभाग
नगरीय विकास एवं आवास
स्कूल शिक्षा
परिवहन
पंचायत एवं ग्रामीण विकास
खनिज साधन
वाणिज्य कर
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*विभाग के आर्थिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखता है कैग*
भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक शासकीय विभागों की आर्थिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखता है. विभागों की आर्थिक अनिमितताओं पर अपना प्रतिवेदन तैयार कर शासन को प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है. कैग अपना प्रतिवेदन फील्ड में जाकर ऑडिट करता है और उसके बाद वह रिपोर्ट तैयार करता है. रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले कैग द्वारा विभाग प्रमुखों से खंडन और स्पष्टीकरण देने के लिए पूर्ण अवसर प्रदान करता है. जब विभागीय उत्तर प्राप्त नहीं होते हैं या फिर वे स्वीकार करने योग्य नहीं होते हैं, तभी लेखा परीक्षा टिप्पणियों को निरीक्षण प्रतिवेदन या लेखा परीक्षा प्रतिवेदन में शामिल करने की प्रक्रिया की जाती है. कैग ने अपने प्रतिवेदन में यह भी कहा है कि ज्यादातर प्रकरणों में बागबाहरा संतोषजनक उत्तर नहीं दिए जाते हैं.
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कैग की रिपोर्टों को गंभीरता से नहीं लेते हैं सरकारी विभाग
समय सीमा में नहीं देते कंडिकाओं का जवाब