पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाने के बाद सरकार ने उपभोक्ताओं को एक और राहत दी है. केंद्र ने सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल के आयात पर कस्टम ड्यूटी खत्म कर दी है. सरकार ने 20 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल पर 2 साल के लिए  एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट​​​​​​ सेस खत्म कर देने का ऐलान किया है। तेल पर यह सेस अभी 5% है। केंद्र के इस फैसले से खाने का तेल सस्ता होने की उम्मीद है। तेलों के आायात पर दी गई केंद्र की यह छूट 31 मार्च 2024 तक लागू रहेगी। गौरतलब है कि महंगाई बढ़ने में खाद्य तेल की प्रमुख भागीदारी है. पिछले तीन महीनों में ही खाद्य तेल के खुदरा दाम में 15 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

वित्त मंत्रालय की तरफ से मंगलवार को इस संबध में सूचना जारी की गई. मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सालाना 20 लाख टन कच्चे सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर इंपोर्ट टैक्स नहीं लगाया जाएगा। यह आदेश वित्त वर्ष 2022-23 और 2023-24 के लिए लागू होगा. केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने ट्वीट करते हुए लिखा, यह फैसला उपभोक्ताओं को महत्वपूर्ण राहत प्रदान करेगा। सरकार ने स्थानीय बाजार में बढ़ती तेल की कीमतों को कम करने के लिए यह कदम उठाया है। पॉम आयल और सोयाबीन तेल समेत ज्यादातर तेलों पर बेस इंपोर्ट टैक्स पहले ही खत्म कर दिया है। साथ ही जमाखोरी रोकने के लिए भी लिमिट लगा दी है।

काला सागर क्षेत्र से रुकी तेल की सप्लाई
गौरतलब है कि रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाने के तेल की कीमतें बढ़ने के साथ ही महंगाई भी बढ़ी है। इस हमले के कारण काला सागर क्षेत्र से सूरजमुखी तेल की सप्लाई ही रुक गई है। भारत अभी भी खाने के तेल की जरूरत का 60% इंपोर्ट करता है। केंद्र सरकार के सामने अभी बढ़ती महंगाई को थामना सबसे बड़ी चुनौती है। अप्रैल में देश में थोक महंगाई दर पिछले तीन दशकों में सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गई है।