देश में (PFI) की तरफ से एक बड़ी साजिश रची जा रही है। 'सिर तन से जुदा' टेरर मॉड्यूल को लेकर ये कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के युवकों पर PFI की नज़र है, जी हाँ ये सच है इस बार यूपी के युवको को टारगेट किया गया है।
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को लेकर एक के बाद एक खुलासे सामने आ रहें हैं। बिहार के फुलवारी शरीफ़ के बाद 7 जुलाई को तेलंगाना पुलिस ने कई PFI कैडर को अरेस्ट किया था। जिसमें एक ट्रेनर था जो PFI को कैडर्स को छोटी आर्म्स चलाने और स्टोन पेल्टिंग करने की ट्रेनिंग दिया करता था। पूछताछ के बाद जांच एजेंसियों और तेलंगाना पुलिस ने ये बड़ा खुलासा किया है।
PFI ने अलग-अलग कई छोटे बिंग बना लिए हैं, जैसे एसडीपीआई, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, नेशनल वुमन फ्रंट ऑफ इंडिया है, यानी कि अलग-अलग छोटे-छोटे ऑर्गेनाइजेशन बनाकर PFI अपना प्रोपेगेंडा फैला रहा है। साथ ही साथ PFI छोटे मदरसों, स्कूलों और कॉलेजों में मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में लोगों का ब्रेन वॉश करने का भी काम कर रहा है।
PFI ने अलग-अलग नामों से कई सारे छोटे-छोटे नए संगठन बनाए हैं, अगर PFI बैन भी हो जाता है, तो भी PFI का एजेंडा काम करता रहेगा। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया जो, कि PFI का पॉलीटिकल विंग है, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया ये स्टूडेंट विंग है, नेशनल वुमन फ्रंट ऑफ इंडिया ये वूमन विंग है, ऑल इंडिया इमाम काउंसलिंग ऐसे कई छोटे-छोटे संगठन बना दिए गए हैं, जो PFI के बैन होने के बाद भी इसके प्रोपेगेंडा को फैलाते रहेंगे।
इसके अलावा कैसे स्टोन पेल्टिंग करनी है, कैसे जो छोटे-छोटे प्रोटेस्ट हैं उसमें दंगा भड़का देना है इसकी प्लानिंग के लिए PFI ने एक नया ब्लू प्रिंट तैयार किया है। साथ ही साथ अगर दक्षिण भारत की बात करें जैसे तेलंगाना वहां पर भी ट्रेनिंग सेंटर चलाया जा रहा था, तो कुल मिलाकर अब अगर एजेंसियों की माने तो केवल साउथ इंडिया में ही 200 से भी अधिक लोगों को ट्रेंड किया जा चुका है जिसमें मार्शल आर्ट से लेकर जो छोटे हथियार हैं, उनको चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
हालांकि PFI बार-बार इन आरोपों को झुठलाता रहता है, लेकिन जिस तरह से एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं, वो काफ़ी ज़्यादा चौंकाने वाले हैं आरोप ये है, कि ये संगठन लोगों को बर्गलाकर उनका ब्रेन वॉश कर रहा है और दंगा भड़काने के लिए आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसा रहा है।
PFI की ब्रांचेस देश के लगभग हर राज्य में मौजूद हैं। बिहार के फुलवारी शरीफ़ के बाद इस मामले में लगातार खुलासे होते जा रहे हैं, उसी क्रम में जब तेलंगाना में जब छापेमारी की गई तो अब्दुल कादिर नाम के शख्स को अरेस्ट किया गया जो, कि मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दे रहा था। इसके बाद हुई गिरफ्तारियों में रिमांड पेपर की कॉपी से ये पता चला, कि ये संगठन सोशल वर्क से पैसा जुटाने का दावा करता है, लेकिन इस पैसे का इस्तेमाल एंटी इंडिया एक्टिविटी में किया जाता है।