एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस आर्थराइटिस का ही एक प्रकार है, जिसमें रीढ़ की हड्डी में लगातार दर्द रहता है और गर्दन से लेकर पीठ के निचले हिस्से तक में अकड़न आ जाती है। स्पाइनल कॉर्ड और स्पाइनल जोड़ों में सूजन और दर्द होता है। यह रोग अक्सर गर्दन, पीठ, कमर, बटुआ, जोड़ों और विकसित हड्डियों में आक्रमण के कारण होता है।
एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस एक अंतर्दृष्टि शोथलिपि रोग है जो मुख्य रूप से रीड की हड्डी और स्पाइनल कॉर्ड के जोड़ों को प्रभावित करता है। यह एक प्रकार की अपवाद श्लेष्मार्दक रोग होता है जिसमें शरीर के विभिन्न हिस्सों के संयुक्त मांसपेशियों और स्नायुयांचल क्षेत्र में सूजन और अलगाव होता है।
इस रोग का मुख्य लक्षण होता है निम्नलिखित हो सकते हैं:
* मांसपेशियों की सूजन,
* कमर और निचले पीठ में दर्द और स्टिफनेस,
* सुबह उठते समय या लंबे समय तक अवसादकर दर्द,
* आँखों के सामने अदृश्यता या छलांगें,
* सीने में दर्द और सूजन का अनुभव हो सकता है, जिससे दिल से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
आयुर्वेद में इस रोग के लिए कुछ आयुर्वेदिक उपाय हैं जो दर्द को कम कर सकते हैं और स्थिति को सुधार सकते हैं। यहां कुछ आयुर्वेदिक उपाय दिए गए हैं जो एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के इलाज में मदद कर सकते हैं:
* गर्म दूध में हल्दी और घी मिलाकर पिएं। यह दर्द को कम करने में मदद कर सकता है।
* दही और घी मिलाकर बनी चाय पीने से भी लाभ मिल सकता है।
* सोयाबीन तेल से अच्छी मालिश करने से राहत मिल सकती है।
* व्यायाम और योगासन करना भी दर्द को कम करने में मदद कर सकता है।
* योगासन में भुजंगासन, पवनमुक्तासन, अर्द्धमत्स्येन्द्रासन, चक्रासन आदि शामिल हो सकते हैं।
आयुर्वेदिक दवाएं जैसे कि योगराज गुग्गुल, सिंहनाद गुग्गुल, गुग्गुल तिक्त कषाय, महायोगराज गुग्गुल आदि भी लेने से लाभ हो सकता है। इसके लिए आप एक प्रशिक्षित आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें।