कई बार लोग मजबूरी में यूरिन को रोक लेते हैं, जैसे लोग पायलट होते हैं जिनके इंजन में शौचालय नहीं होता। ऐसा करने के सबके अलग-अलग कारण होते हैं। शौचालय साफ न होने के कारण ज्यादातर लोग पेशाब रोक लेते हैं। महिलाओं को यह समस्या ज्यादा होती है। सफर के दौरान ट्रेन या बस में गंदे शौचालय से लंबी दूरी तय करने पर महिलाओं को लंबे समय तक पेशाब रोककर रखना पड़ता है। इसके अलावा कई बार आलस या व्यस्तता के कारण लोग शौच नहीं कर पाते हैं और अपने मूत्राशय पर दबाव बढ़ाते रहते हैं। बच्चे अक्सर खेलते या टीवी देखते समय पेशाब नहीं करते हैं।
शरीर के विषैले पदार्थ, हानिकारक जीवाणु तथा अनावश्यक लवण मूत्र के द्वारा बाहर निकल जाते हैं। जब ब्लेडर भर जाता है, तो मस्तिष्क को एक संकेत भेजा जाता है, जिससे यूरिन करने की इच्छा होती है।अगर कोई व्यक्ति थोड़ी देर पेशाब रोके रहे तो कोई हर्ज नहीं है। लेकिन जब किसी व्यक्ति को शौचालय जाने की बजाय पेशाब रोकने की आदत विकसित हो जाती है तो कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
यूरिन रोकना नहीं चाहिए। पास के शौचालय को ढूंढकर जब भी आप चाहें पेशाब करें। 1 साल से कम उम्र के बच्चों को हर घंटे पेशाब करना जरूरी होता है। बढ़ते हुए बच्चे दिन में 10 से 12 बार शौचालय जा सकते हैं और वयस्कों के लिए दिन में 6 बार पेशाब करना सामान्य बात है।
उत्तर- नवजात और छोटे बच्चों के मूत्राशय छोटे होते हैं। इससे उन्हें बार-बार पेशाब जाना पड़ता है। आम तौर पर एक नवजात शिशु एक दिन में लगभग 8 डायपर गीला कर सकता है। अगर बच्चा दिन में सिर्फ 4 डायपर गीला करता है तो इस बारे में तुरंत डॉक्टर से बात करें। साथ ही बच्चे के पेशाब के रंग पर भी ध्यान देना जरूरी है।
यदि आप किसी लंबी यात्रा पर जा रहे हैं तो तैयार रहें क्योंकि लंबे समय तक शौचालय न मिलने की संभावना है। ऐसे समय में पहले से ही रास्ते में आने वाले सार्वजनिक शौचालयों को चिन्हित कर लें। इसके हिसाब से आप मार्ग निर्धारित कर सकते हैं। आजकल पेट्रोल पंपों पर भी शौचालय की सुविधा होती है। रास्ते के ढाबों में भी शौचालय होते हैं।
सफर के दौरान अपने साथ एब्जॉर्बेंट पैड जरूर रखें ताकि आपात स्थिति में आपको परेशानी का सामना न करना पड़े. यह आपको मेडिकल स्टोर्स पर आसानी से मिल जाएगा। साथ ही गंदे सार्वजनिक शौचालयों से निपटने के लिए टॉयलेट सीट पर सैनिटाइजर स्प्रे का इस्तेमाल करें। आप डेटॉल, सेवलॉन जैसे एंटीसेप्टिक लिक्विड वाले डिस्पोजेबल टॉयलेट सीट कवर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इस्तेमाल के बाद आप इन्हें फ्लश कर सकते हैं।
यूरिनरी रिटेंशन से मृत्यु की संभावना बहुत कम होती है। यदि आप लंबे समय तक पेशाब रोक कर रखते हैं, तो मूत्राशय अनायास ही लीक हो सकता है। लेकिन कुछ स्थितियों में लोग इसे लंबे समय तक रोक कर रखने के बाद भी यूरिन पास नहीं कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में यूरिनरी बलैडर फट सकता है। यह स्थिति घातक हो सकती है। हालाँकि, यह स्थिति दुर्लभ है। यह केवल चरम स्थितियों में होता है।
यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के कई कारण हो सकते हैं। इसे बोलचाल की भाषा में बिकोलाई या इकोलाई के नाम से जाना जाता है। बार-बार होने वाले संक्रमण के जोखिम से बचने के लिए हम कुछ कदम उठा सकते हैं...
यूरिन रोक कर न रखें। सेक्स के बाद पेशाब जरूर करें। क्रैनबेरी जूस यूटीआई को रोकता है। टाइट फिटिंग पैंट न पहनें। सूती अंडरवियर ही पहनें। कॉफी, सोडा, शराब या अम्लीय गुणवत्ता वाले पेय से बचें। कम से कम बबल बाथ लें। अपने प्राइवेट पार्ट को अच्छे से धोएं।
अक्सर महिलाएं गर्भावस्था के दौरान बार-बार यूरिन पास करती हैं। इसके अलावा और भी कई दवाइयां और कुछ ड्रिंक्स हैं जिनसे पेशाब तेजी से आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समस्या बढ़ रही है तो यह किसी संक्रमण या बीमारी का लक्षण हो सकता है। तो डॉक्टर से सलाह लें। कई लोगों को इसका अनुभव तब होता है जब वे अचानक खांसते, हंसते या छींकते हैं
बहुत से लोग खांसने, हंसने या छींकने पर अचानक मूत्र रिसाव का अनुभव करते हैं। इस स्थिति को तनाव मूत्र असंयम कहा जाता है। यह पेल्विक फ्लोर की कमजोर मांसपेशियों के कारण होता है। अगर यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है तो आप डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। इस स्थिति से जूझ रहे लोगों के लिए कुछ एक्सरसाइज भी हैं, जिनके जरिए आप घर पर ही इस समस्या से निजात पा सकते हैं।
दरअसल नींद के दौरान हमारा शरीर कम यूरिन करता है। सोते समय हमारा दिमाग किडनी को ज्यादा से ज्यादा पानी सोखने का संकेत देता है, जिससे पेशाब कम बनता है। हालांकि, कई लोगों को शौचालय जाने के लिए आधी रात को उठना पड़ता है।
इस स्थिति को नोक्टुरिया कहा जाता है। शराब और कैफीन का ज्यादा सेवन ब्रेन और किडनी के बीच सिग्नल को कमजोर कर देता है, जिससे नोक्टुरिया की समस्या हो जाती है। अगर आप रोज रात को बाथरूम जाने के लिए उठते हैं तो इसे हल्के में न लें।
नॉर्मल डिलीवरी के बाद कई महिलाओं को यूरिन ज्यादा आने लगता है। इस बीच, यूरिन करना बंद न करें और शौचालय जाना जारी रखें। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान पेशाब भी बढ़ जाता है। साथ ही मेनोपॉज के दौरान मूत्राशय की त्वचा पतली हो जाती है और बलैडर संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
यूरिन होल्ड करने से ये 6 समस्याएं हो सकती हैं-
हानिकारक बैक्टीरिया को मल्टीप्लाई होने का समय मिल जाता है। इससे यूरिनटी ब्लैडर में गंभीर इंफेक्शन हो सकता है। ब्लैडर के लंबे समय तक भरे रहने की वजह से नीचे की ओर एक पाउच जैसा बन जाता है। इससे यूटिन पूरी तरह से रिलीज नहीं हो पाता है। इंफेक्शन की वजह से यूरिनेशन के दौरान दर्द हो सकता है। ब्लैडर में यूटिन के इकट्ठा रहने से किडनी स्टोन की समस्या हो सकती है। ज्यादा देर और बार-बार यूरिन होल्ड करने से यूरिनटी ब्लैडर कमजोर हो जाता है। गर्भवती महिलाओं में यूरिनटी ट्रैक्टइंफेक्शन (यूटीआई) का खतरा बढ़ जाता है।
ब्लैडर को हेल्दी रखने के लिए हम 6 उपाय कर सकते हैं-
यूटीआई के खतरे से बचने के लिए यूरिन को पूरी तरह से रिलीज होने दें। खूब पानी पिएं ताकि यूरिन के रास्ते बैक्टीरिया शरीर से बाहर निकल सकें। सुबह-शाम टहलें। लंबे समय तक बैठे न रहें। बीच-बीच में खड़े होते रहें। तंबाकू से दूर रहें। इससे ब्लैडर कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को कीगल एक्सरसाइज से मजबूत करें। सेक्स करने के बाद अपने प्राईवेट पार्ट को अच्छी तरह साफ करें।