थायराइड के लिए प्राकृतिक जड़ी बूटियां: थायराइड एक ग्रंथि है, जो थायरॉक्सिन नामक एक हार्मोन को रिलीज करती है। यह हमारे शरीर में उपापचय और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करता है। थायरॉयड ग्रंथि को प्रभावित करने वाली स्थिति को थायरॉयडिटिस कहा जाता है। 

इस समस्या को जड़ से खत्म करना बेहद मुश्किल है। थायराइड एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर या तो सूख जाता है या मोटा हो जाता है। इन दोनों तरह की समस्याओं में शरीर में और भी कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं जैसे ज्यादा कमजोरी, थकान, अनियमित पीरियड्स, डिप्रेशन, सांस लेने में दिक्कत जैसी परेशानियां होने लगती हैं।

एलोपैथिक इलाज में जिंदगी भर हार्मोंस लेने पड़ते हैं, थायरायड में वजन बढ़ता और घटता रहता है। ठंड का मौसम आपके शरीर में थायराइड हार्मोन की आवश्यकता को बढ़ा सकता है और इसके डिसबेलेंस के कारण इन लक्षणों को और भी बढ़ा सकता है। 

विभिन्न घरेलू उपचारों की मदद से थायराइड की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। बिना दवाओं के भी घर पर ही थायराइड को नियंत्रित करने के लिए कुछ घरेलू उपाय हैं, जिन्हें आजमाकर आप इससे कुछ राहत तो पा ही सकते हैं।

विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि अगर आपको लगता है कि आपके थायराइड के लक्षण जैसे थकान, कब्ज, शुष्क त्वचा, वजन बढ़ना, आंखों में सूजन, मांसपेशियों में दर्द, कम हृदय गति आदि तमाम दिक्कतें ठंड में होती हैं, तो आपको कुछ बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। 

उदाहरण के लिए, आपको समय पर ब्लूज़ टेस्ट करवाना चाहिए, दवाओं का ध्यान रखना चाहिए, धूप में रहना चाहिए, शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए, मिठाई से बचना चाहिए, पर्याप्त नींद लेनी चाहिए और तनाव से बचना चाहिए। आप कुछ जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल कर थायराइड को नियंत्रित कर सकते हैं, जो आगे के इलाज में मदद कर सकता है।

थायरॉइड के लिए ये जड़ी-बूटियां रामबाण हैं: 

कलौंजी का तेल: थायराइड की समस्या को नियंत्रित करने के लिए आप कलौंजी का इस्तेमाल कर सकते हैं। कलौंजी में एंटी-फंगल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और कोलेस्ट्रॉल कम करने वाले गुण होते हैं। कलौंजी के तेल में थायराइड एंटीबॉडीज को कम करने का गुण होता है। इसके अलावा, यह तनाव, चिंता के लक्षणों में सुधार कर सकता है।

अश्वगंधा: अश्वगंधा एक ऐसी जड़ी बूटी है जिसके कई फायदे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, न्यूरोप्रोटेक्टिव, एडाप्टोजेनिक, हेमटोपोएटिक नींद को बढ़ावा देने वाले और चिंता से राहत देने वाले गुण होते हैं।

अदरक: अदरक सिर्फ एक मसाला नहीं बल्कि एक जड़ी-बूटी है। अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुणों सहित कई स्वास्थ्य पहुंचाने वाले गुण होते हैं। इससे थायराइड ग्रंथि की कार्यप्रणाली में सुधार होता है। यह जड़ी बूटी वजन कम कर सकती है और लिपिड और हार्मोन प्रोफाइल को नियंत्रित कर सकती है।

अगरवुड: इसे अगर या अगरवुड के नाम से भी जाना जाता है। अगर आयुर्वेद की सबसे खास और महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों में से एक है। इसका इस्तेमाल परफ्यूम समेत कई चीजों को बनाने में किया जाता है। पारंपरिक चिकित्सा में इस पौधे को थायराइड कैंसर के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। अगरवुड में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो कई कैंसर सेल लाइनों के लिए हानिकारक होते हैं।

काला जीरा: काले जीरे में फाइटोकेमिकल्स और जैविक घटक होते हैं जो शरीर में विभिन्न कार्यों में सुधार करते हैं। साल 2016 में काले जीरे के थायराइडिसिस पर असर को लेकर एक स्टडी की गई थी। काला जीरा थायराइड की स्थिति में सुधार कर सकता है।

कुथ या ससुरिया कॉस्टस: कुथ का पौधा मोटे और रेशेदार तने के साथ गाजर जैसा दिखता है। इसकी जड़ गाजर की तरह बाहर की ओर होती है। यह सऊदी अरब में इसे लोगों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। इस जड़ी बूटी में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं और इसमें फ्लेवोनॉयड्स भी होते हैं। कुछ अध्ययनों में इस जड़ी बूटी को थायराइड प्रबंधन में प्रभावी पाया गया है।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से इलाज नहीं है। अधिक जानकारी के लिये अपने डॉक्टर से सलाह लें।