मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने डॉक्टरों की हड़ताल को अवैध बताया है। साथ ही कोर्ट ने हड़ताली डॉक्टर्स को तत्काल काम पर लौटने की हिदायत भी दी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि डॉक्टर्स आगे से बिना अनुमति हड़ताल नहीं करें।
एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि ये हड़ताल अवैध है, इसलिए हड़ताल पर बैठे सभी डॉक्टर फौरन काम पर लौटे। हाईकोर्ट ये भी कहा कि आगे से बिना कोर्ट की अनुमति के स्ट्राइक यहां तक की टोकन स्ट्राइक भी नहीं करें।
डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर पूर्व पार्षद इंद्रजीत कुंवर पाल सिंह ने याचिका लगाई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की डिवीजन बेंच ने बुधवार को यह फ़ैसला सुनाया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद डॉक्टर्स ने संगठन पदाधिकारियों की मीटिंग बुलाई है।
इस निर्णय को हड़ताल पर गए डॉक्टर्स के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। बुधवार सुबह से प्रदेश में 15 हजार से ज्यादा सरकारी डॉक्टर बुधवार से हड़ताल पर चले गए थे। हालाँकि हड़ताल को देखते हुए सरकार के वैकल्पिक प्रयास किये थे लेकिन ये प्रयास अस्पतालों में नाकाफी दिखे और मरीज़ परेशान होते देखे गए। हड़ताल से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ सुविधाएं चरमरा गईं थीं और ऑपरेशन तक टालने पड़े थे।
इससे पहले देर रात तक चली सरकार और डॉक्टरों की बैठक असफल रही। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के आवास पर डॉक्टर्स के साथ बैठक बेनतीजा रही। करीब एक घंटे चली बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, चिकित्सक संगठन के पदाधिकारी और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा भी मौजूद रहे।
डॉक्टर्स केन्द्र के समान डीएसीपी लागू किये जाने की मांग कर रहे हैं। चिकित्सक संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि सरकार निर्णय नहीं लेती है, तो हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी। सोमवार को डॉक्टर्स ने काली पट्टी बांधकर मरीजों का इलाज किया था। मंगलवार को भी सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक दो घंटे के लिए काम बंद कर डॉक्टर्स ने 3 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी।