कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध हटाने से इनकार करने पर कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करने के लिए बुधवार को राजी हो गया। 

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने वकील प्रशांत भूषण की उन दलीलों पर गौर किया कि याचिकाएं काफी पहले दायर की गयी थीं लेकिन इन्हें अभी तक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है। प्रशांत भूषण ने कहा, ‘‘लड़कियों की पढ़ाई छूट रही है।'' इस पर पीठ ने कहा, ‘‘इसे अगले सप्ताह किसी दिन सूचीबद्ध किया जाएगा।'' 

हम आपको बता दें, हिजाब विवाद कर्नाटक में तब सामने आया जब एक कॉलेज में हिजाब पहनी छात्राओं को कक्षाओं में प्रवेश  करने से रोक दिया गया था। बाद में 5 फरवरी 2022 को कर्नाटक सरकार ने कॉलेजों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया गया।

कर्नाटक हाइकोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि क्लासरूम में हिजाब पहनने की अनुमति देने से "मुसलमान महिलाओं की मुक्ति में बाधा पैदा होगी" और ऐसा करना संविधान की 'सकारात्मक सेकुलरिज्म' की भावना के भी प्रतिकूल होगा। 

कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा था कि हिजाब इस्लाम के अनुसार अनिवार्य नहीं है, हाइकोर्ट की फुल बेंच ने अपने 129 पन्ने के फ़ैसले में कुरआन की आयतों और कई इस्लामी ग्रंथों का हवाला दिया है। इन उद्धरणों के आधार पर अदालत ने कहा है कि हिजाब इस्लाम के लिए अनिवार्य नहीं है. अदालत ने 11 दिन की सुनवाई के बाद यह फ़ैसला दिया है.

अब कर्नाटक हाई कोर्ट के इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए, छात्राओं की ओर से एक स्पेशल लीव पेटिशन दायर की गई है।