टाइगर स्टेट मप्र में अब चीता को भी  देखने को मिल सकेगा. भारत में 72 साल पहले विलुप्त हुए चीतों का पुनर्जन्म पालपुर कूनो नेशनल पार्क में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 72 वें जन्मदिवस पर कुनो में चीतों का बसाहट से देश में इतिहास रच गया. चीतों  के कुनो लाने के लिए चली लंबी जद्दोजहद के बाद शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीतों को बाड़े में छोड़ा.

देश की राजधानी दिल्ली से करीब 8 हजार किलोमीटर दूर नामीबिया की राजधानी विंडहोक से उड़ान भरकर विमान शनिवार सुबह ग्वालियर में पहुंचा और ग्वालियर में लैंड करने के बाद हेलीकॉप्टर के जरिए उन्हें मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क ले जाया गया. चीतों के आगमन पर स्वागत में श्योपुर से कुनो नेशनल पार्क सड़क मार्ग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और चीतों के बड़े-बड़े कटआउट लगाए गए.  

क्वारंटाइन पीरीयड में रखे जाएंगे चीते

नामीबिया से लाए जा रहे 8 चीतों में 5 मादा हैं जबकि 3 नर चीता हैं. मादा चीतों की उम्र 2 से 5 साल के बीच है जबकि नर चीतों की उम्र 4.5 से 5.5 साल के बीच है. इन चीतों को एक महीने तक क्वारंटाइन पीरियड में रखा जाएगा और इस दौरान 2-3 दिन में इन्हें खाने के लिए 2-3 किलो मीट दिया जाएगा. नामीबिया से आ रहे तमाम चीतों के गले में एक सैटेलाइट-वीएचएफ रेडियो कॉलर आईडी मौजूद होगी. जिसकी मदद से भविष्य में उनकी मॉनिटरिंग से लेकर संक्रमण तक ट्रैक करने में मदद मिलेगी. वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि चीतों भारतीय मौसम से लेकर यहां के माहौल में ढलने में 1 से 3 महीने का वक्त लग सकता है.

यह भी अजीब संयोग रहा

यह भी अजीब संयोग रहा कि उस पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ जेस चौहान के कार्यकाल में चीतों की बसाहट हो रही है. जिसने बतौर डीएफओ कूनो नेशनल पार्क से बिना विवाद के चलते 24 गांवों का सफलतापूर्वक विस्थापन कराया. मौजूदा पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ जेएस चौहान पर तब विस्थापन के दौरान स्थानीय विधायकों ने विस्थापन राशि में गड़बड़ी का आरोप लगाया था. इस आरोप से आहत चौहान ने संभाग आयुक्त की उपस्थिति में ग्राम सभा की बैठक बुलाई थी.

इस बैठक में आरोप लगाने वाले विधायकों को चौहान ने आरोप सिद्ध करने की चुनौती देते हुए ऐलान कर दिया कि अगर विस्थापन में हुई गड़बड़ी सिद्ध हो गई तो  वे अखिल भारतीय वन सेवा से त्यागपत्र दे देंगे. उनकी इस घोषणा पर ग्राम सभा में  उपस्थित संभाग आयुक्त  और कलेक्टर हक्का-बक्का हो गए थे. यही नहीं संभागायुक्त और कलेक्टर एक दूसरे की बगले झांकने लगे. बैठक में ही उपस्थित विस्थापित हुए ग्रामीणों ने ही कहा कि स्थानीय विधायकों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चौहान ने पूरी ईमानदारी से विस्थापन का काम किया है. हमें विस्थापन में सभी तरह की सुविधाएं  उपलब्ध हुई है.