दादी मां के उपाय:
मासिक धर्म की समस्या क्यों होती है, मासिक धर्म की समस्या ठीक करने के लिए घर पर करें यह उपचार, मासिक धर्म-विकार..
मासिक धर्म संबंधी विकार, आधुनिकता के इस युग में 80 से 90 प्रतिशत महिलाओं में पाए जाते हैं। इसका मुख्य कारण है-रहन-सहन और खानपान में बदलाव। मासिक धर्म संबंधी विकार का प्रभाव स्त्री के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इसका प्रभाव कभी-कभी प्राणघातक भी हो जाता। साधारण दुःख-दर्द तो लगा ही रहता है।
मासिक धर्म के विकारों में अधिकांशतया सिर दर्द, अनिद्रा, हृदय का तेज धड़कना, चिड़चिड़ापन, दुर्बलता, निरुत्साह यहां तक कि कभी-कभी तो बोलने के लिए भी मन का न होना आदि-आदि व्याधियां होती हैं।
मासिक धर्म की अनियमितता तथा विकृति के कारण सामान्य आयु से पूर्व रजोदर्शन होना, यौवनावस्था आने पर भी आर्तव का कम आना अथवा न आना, अनियमित आर्तव-चक्र, रक्तस्राव कम-अधिक होना, रक्तस्राव अधिक दिनों तक होना। मास में एक बार के स्थान पर अधिक बार रजोदर्शन, मासिक धर्म में अत्यधिक पीड़ा होना आदि है।
यहां हम कुछ घरेलू चिकित्सा का उल्लेख कर रहे हैं :
(1) दो तोला अशोक की छाल लें। थोड़ी कूटकर 250 ग्राम दूध और 250 ग्राम पानी में पकाएं। जब मिश्रण आधा बचे तो छान लें और मीठा करके पीएं। कुछ दिन के प्रयोग से मासिक धर्म में खून की अधिकता दूर हो जाएगी।
(2) एक तोला मिट्टी को कूटकर 250 ग्राम पानी में घोलकर रात भर रख दें। सुबह पानी निथार कर पी जाएं। यह खून रोकने के लिए लाभदायक है।
(3) गाजर के बीज एक तोला और गुड़ दो तोला आधे पानी में उबालें। जब पानी एक तिहाई रह जाए तो छानकर पीएं। कुछ दिन के प्रयोग से बंद माहवारी खुल जाती है।
(4) काले तिल एक तोला। गोखरन 1 तोला। दोनों को 250 ग्राम पानी में भिगोकर रखें। प्रातः इसे पानी सहित पीसकर छान लें और छने द्रव को पीएं। कुछ दिनों के प्रयोग से माहवारी जारी हो जाएगी।
(5) यदि मासिक धर्म की अधिकता हो तो गदराए हुए गूलर छाया में सुखा लें। वे जब भली प्रकार सूख जाएं तो उनको बारीक पीस लें। पिसी हुई मात्रा के अनुसार ही उसमें पिसी चीनी मिलाएं। इस मिश्रण को स्वच्छ शीशी में रख लें। यह चूर्ण 6 माशा सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें। इससे रक्त की अधिकता पर अंकुश लगेगा. साथ ही शरीर की दुर्बलता भी दूर होगी।