देश भर के राज्यों में NIA और ED की छापेमारी के बाद केंद्र सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर पांच साल के लिए बैन लगा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार सुबह जारी गजट नोटिफिकेशन में पीएफआई को गैर-कानूनी संस्था घोषित कर दिया गया। पीएफआई के अलावा इसके 8 सहयोगी संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

इस प्रतिबन्ध के बाद PFI ना कोई कार्यक्रम आयोजित कर सकता है, न तो उसका कोई दफ्तर होगा, न वो कोई सदस्यता अभियान चला सकता है और न ही फंडिंग ले सकता है। नोटिफिकेशन में सरकार ने कहा कि PFI और इससे जुड़े संगठन देश में आतंकवाद का समर्थन कर रहे हैं इसलिए केंद्र सरकार UAPA के तहत यह कार्रवाई की है। 

वहीं यह सवाल भी उठ रहा है कि बैन के बाद PFI की गतिविधियों पर वास्तव में रोक लग जाएगी या फिर किसी नए नाम से या फिर किसी पुराने संगठन के नाम पर ही PFI पर्दे के पीछे से अपनी गतिविधियों के अंजाम देती रहेगी? सोशल मीडिया पर भी यह चिंता जाहिर की जा रही है। 

पहले भी यह जानकारी सामने आई थी कि PFI ने अलग-अलग नाम से कई छोटे बिंग बना लिए हैं। यानी कि अलग-अलग छोटे-छोटे ऑर्गेनाइजेशन बनाकर PFI अपना प्रोपेगेंडा फैला रहा है। साथ ही साथ PFI छोटे मदरसों, स्कूलों और कॉलेजों में मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में लोगों का ब्रेन वॉश करने का भी काम कर रहा है। 

हालांकि PFI देश विरोधी गतिविधियों के आरोपों को बार-बार झुठलाता रहा है, लेकिन हाल ही में NIA और ED की छापेमारी के बाद जिस तरह की जानकारी सामने आ रही है वह काफ़ी ज़्यादा चौंकाने वाली है। बड़ी चुनौती यह भी है कि PFI का विस्तार अब देश के लगभग हर राज्य में है। 

पीएफआई के अलावा आज बैन किए गए उसके 8 सहयोगी संगठनों में रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (AIIC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO), नेशनल वीमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन, केरल जैसे सहयोगी संगठनों के नाम शामिल हैं।