उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए आज वोटिंग जारी है। इसके अलावा परिणाम भी आज ही घोषित कर दिए जाएंगे। वर्तमान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा, ऐसे में एनडीए के जगदीप धनखड़ और विपक्षी उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा में से जो भी जीतेगा, वह उपराष्ट्रपति के तौर पर 11 अगस्त को शपथ ग्रहण करेगा।
जानते हैं, कि कैसे उपराष्ट्रपति का चुनाव होता है और कौन-कौन उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ने की पात्रता रखता? राष्ट्रपति के चुनाव से उपराष्ट्रपति का चुनाव कितना अलग होता है? कैसे इसमें जीत और हार का फैसला होता है?
चुनाव की प्रक्रिया में कब क्या कैसे होगा?
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए आज सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक मतदान जारी रहेगा। इसके तुरंत बाद ही वोटों की गिनती की जाएगी। चुनाव के नतीजे भी छह अगस्त को ही आ जाएंगे। वहीं नए उपराष्ट्रपति का शपथ ग्रहण 11 अगस्त को होगा।
उपराष्ट्रपति में कौन वोट डालता है?
उपराष्ट्रपति चुनाव में राज्यसभा के 233 निर्वाचित सांसद, राज्यसभा में मनोनीत 12 सांसद और लोकसभा के 543 सांसद वोट डाल सकते हैं। इस तरह के कुल 788 लोग वोट डाल सकते हैं। जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग होने के कारण इस वक्त राज्यसभा में जम्मू कश्मीर के कोटे की चार सीटें रिक्त हैं।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के इस्तीफे की वजह से भी एक सीट रिक्त है। इस तरह निर्वाचित सदस्यों की वर्तमान संख्या 228 ही है। वहीं, मनोनीत सांसदों की भी तीन सीटें खाली हैं। इस तरह से इलेक्टोरल कॉलेज में कुल सदस्य संख्या फिलहाल 780 ही है।
उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान होता कैसे है?
संविधान के अनुच्छेद 66 में उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया का जिक्र है। यह चुनाव अनुपातिक प्रतिनिधि पद्धति से किया जाता है। इसमें वोटिंग सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम से होती है। आसान शब्दों में इस चुनाव के मतदाता को वरीयता के आधार पर वोट देना होता है। मसलन वह बैलट पेपर पर मौजूद उम्मीदवारों में अपनी पहली पसंद के उम्मीदवार को एक, दूसरी पसंद को दो और इसी तरह से अन्य प्रत्याशियों के आगे अपनी प्राथमिकता नंबर के तौर पर लिखता है। ये पूरी प्रक्रिया गुप्त मतदान पद्धति से होती है। मतदाता को अपनी वरीयता सिर्फ रोमन अंक के रूप में दर्ज करनी होती है। इसे लिखने के लिए चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए खास पेन का इस्तेमाल करना होता है। चूंकि इस चुनाव में दो ही उम्मीदवार हैं, ऐसे में जीत के लिए जरूरी वोट पहले चरण की मतगणना में ही किसी एक उम्मीदवार को मिल जाएंगे। ऐसे में यह प्रक्रिया बार-बार नहीं दोहरानी पड़ेगी।
मतों की गणना का कैसे की जाती है?
पहले यह देखा जाता है कि सभी उम्मीदवारों को पहली प्राथमिकता वाले कितने वोट मिले हैं। फिर सभी को मिले पहली प्राथमिकता वाले वोटों को जोड़ा जाता है। कुल संख्या को दो से भाग किया जाता है और भागफल में एक जोड़ दिया जाता है। अब जो संख्या मिलती है उसे वह कोटा माना जाता है जो किसी उम्मीदवार को काउंटिंग में बने रहने के लिए जरूरी है।
अगर पहली गिनती में ही कोई कैंडिडेट जीत के लिए जरूरी कोटे के बराबर या इससे ज्यादा वोट हासिल कर लेता है तो उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है। अगर ऐसा न हो पाए तो प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। सबसे पहले उस उम्मीदवार को चुनाव की रेस से बाहर किया जाता है जिसे पहली गिनती में सबसे कम वोट मिले हों।
इसके बाद जो उम्मीदवार रेस से बाहर होता है उसे पहली प्राथमिकता देने वाले वोटों में यह देखा जाता है कि दूसरी प्राथमिकता किसे दी गई है। फिर दूसरी प्राथमिकता वाले ये वोट अन्य उम्मीदवारों के खाते में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। इन वोटों के मिल जाने से अगर किसी उम्मीदवार के मत कोटे वाली संख्या के बराबर या ज्यादा हो जाएं तो उस उम्मीदवार को विजयी घोषित कर दिया जाता है।
अगर दूसरे राउंड के अंत में भी कोई उम्मीदवार न चुना जाए तो प्रक्रिया जारी रहती है। सबसे कम वोट पाने वाले कैंडिडेट को बाहर कर दिया जाता है। उसे पहली प्राथमिकता देने वाले बैलट पेपर्स और उसे दूसरी काउंटिंग के दौरान मिले बैलट पेपर्स की फिर से जांच की जाती है और देखा जाता है कि उनमें अगली प्राथमिकता किसे दी गई है।
फिर उस प्राथमिकता को संबंधित उम्मीदवारों को ट्रांसफर किया जाता है। यह प्रक्रिया जारी रहती है और सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवारों को तब तक बाहर किया जाता रहेगा जब तक किसी एक उम्मीदवार को मिलने वाले वोटों की संख्या कोटे के बराबर न हो जाए।
उपराष्ट्रपति के पास क्या जिम्मेदारियां होती हैं, कैसे करते हैं काम?
यूं तो उपराष्ट्रपति की संवैधानिक जिम्मेदारियां बहुत सीमित हैं लेकिन राज्यसभा के सभापति के तौर पर भूमिका काफी अहम हो जाती है। इसके अलावा उनकी जिम्मेदारी तब और अहम हो जाती है, जब राष्ट्रपति का पद किसी वजह से खाली हो जाए। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति की जिम्मेदारी भी उपराष्ट्रपति को ही निभानी पड़ती है क्योंकि राष्ट्रप्रमुख के पद को खाली नहीं रखा जा सकता। देश के प्रोटोकॉल के हिसाब से भी राष्ट्रपति सबसे ऊपर होता है। इसके बाद उपराष्ट्रपति और फिर प्रधानमंत्री।
राष्ट्रपति चुनाव से कितना अलग है उपराष्ट्रपति का चुनाव?
उपराष्ट्रपति चुनाव में संसद के दोनों सदनों के सदस्य वोट डालते हैं। इनमें राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी शामिल होते हैं। राष्ट्रपति चुनाव में निर्वाचित सांसद और सभी राज्यों के विधायक मतदान करते हैं। राष्ट्रपति चुनाव में मनोनीत सांसद वोट नहीं डाल सकते हैं, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में ऐसा नहीं है। उपराष्ट्रपति चुनाव में ऐसे सदस्य भी वोट कर सकते हैं।