कैंसर पैदा करने वाला वायरस मस्तिष्क की कोशिकाओं को किस प्रकार प्रभावित करता है?  इस सवाल का जवाब आईआईटी-इंदौर की टीम के पास है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इंदौर के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में पाया है कि कैंसर पैदा करने वाला एपस्टीन बार वायरस (EBV) मस्तिष्क की कोशिकाओं को प्रभावित करता है और इससे तंत्रिका संबंधी विकार हो सकते हैं।

सबसे अधिक पाए जाने वाले वायरस में से एक, एपस्टीन बार वायरस (ईबीवी) हर्पीस वायरस फैमिली का ही सदस्य है और ये आमतौर पर मानव मुख में पाए जाने वाले लार के माध्यम से फैलता है। हालांकि ये सामान्य रूप से कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है, लेकिन वायरस शरीर के अंदर कुछ असामान्य स्थितियों जैसे कमज़ोर प्रतिरक्षी तंत्र या प्रतिरक्षा क्षमता में कमी होने पर पुनः: सक्रिय हो जाता है।

आईआईटी इंदौर की शोध टीम ने मस्तिष्क की कोशिकाओं में कैंसर पैदा करने वाले वायरस के संभावित प्रभावों का पता लगाने के लिए रमन माइक्रो-स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का उपयोग किया। शोध टीम ने पाया कि यह वायरस फैटी एसिड, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन घटकों जैसे जैव-अणुओं को परिवर्तित कर देता है, जिससे यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव डालने के साथ- साथ मस्तिष्क कैंसर जैसी कई बीमारियों का कारण भी बनता है।

हालांकि, वैज्ञानिकों अभी भी ये जानने में लगे हे हैं, कि यह वायरस मस्तिष्क की कोशिकाओं को कैसे प्रभावित करता है और उनमें किस तरह के परिवर्तन आते हैं। एसीएस केमिकल न्यूरो साइंस जर्नल में प्रकाशित एक शोध से पता चला है कि वायरल प्रभाव के कारण न्यूरोनल कोशिकाओं में विभिन्न बायो मॉलिक्यूल में समय पर और क्रमिक परिवर्तन हो सकते हैं।

आईआईटी इंदौर में इंफेक्शन बायोइंजीनियरिंग ग्रुप के ग्रुप लीडर डॉ हेम चंद्र झा ने कहा, "यह शोध केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के विभिन्न भागों में ईबीवी की मध्यस्थता वाले जैव-अणुओं में परिवर्तनों को समझने में सहायता करता है, जिससे तंत्रिका तंत्र की बीमारियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है ।"  टीम ने ये भी देखा कि वायरल प्रभाव के कारण कोशिकाओं में लिपिड, कोलेस्ट्रॉल, प्रोलाइन और ग्लूकोज अणुओं की संख्या बढ़ गई है। ये बायोमोलेक्यूलर संरचनाएं अंततः कोशिकाओं के वायरल अधिग्रहण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इस बीच, इस बात की भी जानकारी मिली कि इन जैव-आणविक परिवर्तनों को वायरस के प्रभाव और तंत्रिका संबंधी जटिलताओं से किस प्रकार जोड़ा जा सकता है। टीम ने कहा कि रमन माइक्रोस्कोपी एक कम लागत वाला और प्रभावी रूप से नैदानिक सेटिंग्स में वायरस से जुड़ी सेलुलर जटिलताओं का अध्ययन करने में सहायक है। यह अन्य तकनीकों की तुलना में नैदानिक नमूनों का विश्लेषण करने में एक अलग सोर्स प्रदान कर सकता है, जिसके लिए कोशिकाओं, ऊतकों और अंगों में वायरस से जुड़े परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए उन्नत सेटअप की आवश्यकता होती है।