भोपाल: राज्य सरकार ने 827 वन ग्रामों में से 82 वन ग्रामों को पहले चरण में राजस्व ग्राम बना दिया है। लेकिन इन परिवर्तित ग्रामों में किसी भी निवासी को भू-अधिकार पुस्तिका या ऐसा अन्य कोई अभिलेख या उसकी प्रति जारी नहीं की जायेगी और न ही वह निवासी अपनी भूमि का विक्रय कर सकेगा, न दान में दे सकेगा या अन्यथा अंतरित कर सकेगा।
उक्त 82 वन ग्राम डिंडोरी जिले के हैं जिन्हें राजस्व ग्राम में बदलने का निर्णय लिया गया है। उल्लेखनीय है कि राज्य मंत्रिपरिषद ने 26 मई 2022 को 827 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने का निर्णय लिया था जिसके तारतम्य में यह कार्यवाही पहले चरण में की गई है।
डिंडोरी जिले के विकासखंड समनापुर के 16, विकासखंड करंजिया के 25, विकासखंड डिंडोरी के 8, विकासखंड अमरपुर के 9, विकासखंड बजाग के 5, विकासखंड शहपुरा के 7 तथा विकासखंड मेहंदवानी के 12 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदला गया है।
अब इन परिवर्तित ग्रामों के राजस्व भू-अभिलेख तैयार किये जायेंगे तथा इन्हें निकटतम पटवारी हल्के में शामिल किया जायेगा।
राजस्व अभिलेखों में इन परिवर्तित ग्रामों के भू धारकों को वनाधिकार धारक कहा जायेगा तथा इन भूमियों में नामांतरण सिर्फ परिवार के लोगों में ही किया जा सकेगा। प्रत्येक वनाधिकार धारक की भूमि का सीमांकन भी किया जायेगा। जब वन विभाग विधि अनुसार इन परिवर्तित ग्रामों का निर्वनीकरण करेगा, तब इन परिवर्तित ग्रामों में भूमि की खरीद-फरोख्त अन्य राजस्व ग्रामों की तरह हो सकेगी।