भोपाल. मध्यप्रदेश में एक तरफ वनों में कटाई और अतिक्रमण सरकार के लिए चुनौती है तो वहीं दूसरी तरफ इन सबको रोकने के लिए वन विभाग में अफसरों की रिक्त पदों की पोस्टिंग न होना दोहरी चुनौती के रूप में सामने खड़ी है। लंबे समय से मुख्यालय से लेकर फील्ड में आईएफएस-एसडीओ समेत के 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं। पोस्टिंग की प्रत्याशा में आशा और निराशा आईएफएस अफसर पेंडुलम बने हुए हैं। अब तो उनके सब्र का बांध भी टूट रहा है, क्योंकि पोस्टिंग के प्रस्ताव मंत्रालय में अटके है। सूत्रों ने बताया कि इन पर अभी तक सीएम की ओर से हरी झंडी नहीं मिल पा रही है।
वन विभाग में पहली बार पन्ना टाइगर रिजर्व और संजय टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर के पद साल भर से ज्यादा समय से रिक्त है। कमोवेश यही स्थिति सिवनी और शहडोल सर्किल की है, जहां मुख्य वन संरक्षक या वन संरक्षक के पद खाली है। इसी प्रकार से करीब 6-7 महीनों सीएफ ग्वालियर सर्किल के पद खाली है। इन सभी पदों का अतिरिक्त प्रभार से संचालन किया जा रहा है। रीवा सर्किल भी दो महीने से रिक्त है। रिक्त पदों पर पोस्टिंग करने का प्रस्ताव मंत्रालय में डंप है।
डबल प्रभार के चलते वर्किंग प्लान पर असर
सिवनी, शहडोल, ग्वालियर और रीवा सर्किल और पन्ना टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर के पद वर्किंग प्लान लिखने वाले अफसरों को दिए गए हैं। डबल-डबल प्रभार सौंपने का असर वर्किंग प्लान लिखने पर पड़ रहा है। जबकि ईमानदारी से वर्किंग प्लान लिखने में कम से कम डेढ़ साल से कम समय नहीं लगता है। लेकिन अब ज्यादातर अफसर 'कट-पेस्ट' कर वर्किंग प्लान लिख रहें हैं। यही वजह रही कि भोपाल और धार के वर्किंग प्लान में कई खामियां उजागर हो रही है। 2020-21 तक विभाग में परम्परा रही कि वर्किंग प्लान लिखने वाले अफसर को टेरिटोरियल का प्रभार नहीं दिया जाता रहा है। लेकिन महकमे में पीपी मोड की परम्परा पनपी और प्रभार देने की शुरुआत हुई।
सामाजिक वानिकी और उत्पादन डीएफओ के पद खाली
सामाजिक वानिकी बैतूल, सागर, जबलपुर, रीवा, रतलाम, झाबुआ और सिवनी, भोपाल, सागर, इंदौर समेत एक दर्जन से अधिक सामाजिक वानिकी डीएफओ के पद खाली है। इसके अलावा आधा दर्जन से अधिक उत्पादन डीएफओ के पद रिक्त है। इन पदों को टेरिटोरियल डीएफओ को अतिरिक्त प्रभार में दिया गया है। वैसे विभाग में उत्पादन डीएफओ के पद को लूपलाइन का पद माना जाता है। यही वजह है कि इन पदों जो भी आईएफएस पदस्थ है, उनकी सत्ता के गलियारों में कोई सुनवाई नहीं हुई है। ऐसी एक धारणा बन गई है।
2022 बैच के आईएफएस को चाहिए प्राइम पोस्टिंग
पीपी मोड में पोस्टिंग परम्परा के चलते ही 2022 के रसूखदार आईएफएस अफसर अपनी पहली ही पोस्टिंग में ही बड़े और प्राइम वन मंडल लेने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। यहां यह भी उल्लेख करना उचित होगा कि नए आईएफएस को डीएफओ सामाजिक वानिकी अथवा उत्पादन शाखा में पदस्थ करने का प्रावधान है। लंबे समय से सामाजिक वानिकी अथवा उत्पादन डीएफओ के पद रिक्त है। इन्हीं पदों पर 2022 बैच के आईएफएस अफसरों को पदस्थ करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इन प्रस्तावों के विपरीत 2022 बैच के आईएफएस पीपी मोड के तहत मुख्यालय के प्रस्ताव को बदलवाने में अपनी ताकत झोंक दी है। इसी वजह से करीब डेढ़ महीने से उनकी पोस्टिंग नहीं हो पा रही है। इस बैच के आईएफएस अफसरों में हितेश खंडेलवाल, विकास शर्मा, नीरज निश्चिल, हिमांशु त्यागी, प्रितेश मनोहर लाल पाखले, विनोद जाखड़, ए प्रभांजन रेड्डी, अंशुल तिवारी, गुरलीन कौर, सुंदर निवेदन, सुश्री मेनेगा वी, और शैलेष मैकेरा की पोस्टिंग डीएफओ के पद पर होने का प्रस्ताव लंबित हैं।
फील्ड में एसडीओ के पद खाली
प्रत्येक टाइगर रिजर्व और 22 वन मंडलों में एसडीओ के पद खाली है। इन पदों पर पोस्टिंग नहीं होने की वजह से रेंजरों को एसडीओ का प्रभार दिया गया है। एसडीओ का प्रभार लेने वाले रेंजर अपनी मनमानी कर रहें हैं। चूंकि उनको प्रभार राजनीतिक रसूख की वजह से मिली है, इसलिए गड़बड़ी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। कई रेंजर को एसडीओ का प्रभार मिलने के बाद डीएफओ की नहीं सुन रहें हैं।
पीसीसीएफ और एपीसीसीएफ के पद खाली
वर्तमान में मुख्यालय में पीसीसीएफ विकास, पीसीसीएफ ग्रीन इंडिया मिशन और बांस मिशन, पीसीसीएफ वित्त, पीसीसीएफ प्रशासन-एक, पीसीसीएफ प्रशासन-2, समन्वय और पीसीसीएफ वर्किंग प्लान के पद खाली है। इसके कारण मुख्यालय में भी पदस्थ अफसरों के पास दो से लेकर 4 शाखाओं के प्रभार है। सबसे अधिक प्रभार बीएस अन्नागिरी और मनोज अग्रवाल के पास है। वन्य प्राणी शाखा में एपीसीसीएफ के पद है पर एक ही पदस्थ हैं। सिंह परियोजना के मुखिया का पद सीसीएफ अथवा सीएफ का है किन्तु कुनो परियोजना की वजह से एपीसीसीएफ उत्तम शर्मा को वहां से डिस्टर्ब नहीं किया जा रहा है। मुख्यालय में पदस्थ एपीसीसीएफ मोहन मीणा एक मात्र ऐसे अधिकारी जिनके पास कोई खास काम नहीं है। उन्हें एपीसीसीएफ वर्किंग प्लान का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था किन्तु पीसीसीएफ वर्किंग प्लान मनोज अग्रवाल के बीच अधिकारों के लेकर टकराहट हुई और मीणा से अतिरिक्त प्रभार ले लिया गया।