भोपाल: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 4 माह पहले जंगली हाथी के जलाने के मामले में वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो एवं स्पेशल टास्क फोर्स की टीम जांच करके लौट गई. सूत्रों के अनुसार इस घटना के लिए बीट गार्ड कमल कोल घोरीघाट को दोषी ठहराया जा रहा है. उसे निलंबित करने की भी खबर है.

स्पेशल टास्क फोर्स के चले जाने के बाद अब बांधवगढ़ पार्क प्रबंधन ने सहायक संचालक सुधीर मिश्रा की अध्यक्षता में एक और जांच कमेटी का गठन कर दिया है. यह जांच दोषियों को बचाने की मंशा से की गई है. सुधीर मिश्रा की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट अपने की समय सीमा तय नहीं की गई है. 

सूत्रों ने बताया कि हाथी के जलाने की घटना कोकाल प्रबंधन सतही तौर पर ले रहा है. पार्क के उप संचालक ललित भारती का कहना है कि प्रक्रियात्मक त्रुटि हुई है. उनके बयान से यह स्पष्ट है कि मिश्रा कमेटी भी इसी आधार पर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी. सूत्रों के अनुसार इस घटना के मामले में बीट गार्ड कमल कोल, सुरक्षाकर्मी बेलानी कोल और रेंजर पनपथा बफर जोन शील सिंधु श्रीवास्तव पर कार्रवाई की जाना चाहिए.

क्या है मामला-

जनवरी माह में बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व के वन परिक्षेत्र पनपथा (बफर) के छतवा के आरएफ 236 घौरीघाट में जंगली हाथी के अवशेष मिले हैं। मामले में जंगली हाथी को जहर खिलाकर शिकार करने व मृत्यु के बाद जलाने के आरोप लग रहे हैं. बताया जा रहा है कि जंगल के बीच से आ रही दुर्गंध व मौके पर पड़ी हाथी की हड्डी व अन्य अवशेष से घटना का खुलासा हुआ था. हालांकि पार्क प्रबंधन ने किसी भी प्रकार के शिकार व जलाने की घटना की पुष्टि नहीं की थी. इसीलिए वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो एवं स्पेशल टास्क फोर्स की टीम पहुंचकर कर रही मामले की जांच करने बांधवगढ़ नेशनल पार्क गई थी.

टाइगर के पंजे गायब होने की जांच चौधरी करेंगे

पिछले दिनों शहडोल जिले के ब्यौहारी मैं निर्माणाधीन रेल लाइन के पास टाइगर का शव बरामद हुआ. घटना में टाइगर शव के शरीर के पंजे गायब थे. अनुमान लगाया जा रहा है कि जादू-टोने के चक्कर में टाइगर का पंजा काटकर शिकारी ले गए हैं. इस मामले की जांच के लिए मुख्य वन संरक्षक लखनलाल उईके शहडोल उत्तर डीएफओ गौरव चौधरी को जांच का जिम्मा सौंपा है.