नगर निगम व बिजली कंपनी के बीच बकाया बिजली बिल को लेकर खींचतान बढ़ गई है। बिजली कंपनी एक के बाद एक अब तक 100 से अधिक कनेक्शन काट चुकी है। ये कनेक्शन निगम के थे जिनमें एसटीपी, जोनल कार्यालय और सबसे अधिक स्ट्रीट लाइट के हैं। कुछ ठिकानों पर तो पेयजल आपूर्ति से जुड़े कनेक्शन भी काट दिए गए हैं जिन्हें बिजली कंपनी ने मंगलवार देर रात को वापस जोड़ दिए थे। बाकी के काटे गए कनेक्शनों को नहीं जोड़ा गया है ।
उधर बिजली कंपनी की कार्रवाई के आगे निगम के अधिकारी झुकने के लिए तैयार नहीं है। बीते दो दिनों में एक रुपये बकाया जमा नहीं किया है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि बिजली कंपनी से उसकी करोड़ों रुपये की लेनदारियां हैं जिसका हिसाब-किताब लगाया जा रहा है। वह भी बिजली कंपनी को वसूली के लिए नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है। इतना ही नहीं, अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाए हैं कि बिजली कंपनी ने पहले आम उपभोक्ताओं को परेशान किया अब निगम की मुश्किलें बढ़ाना चाहती है। यह ठीक व्यवहार नहीं है।
पिस रही आम जनता
निगम व बिजली कंपनी के अधिकारियों के बीच चल रही खींचतान में आम जनता पीस रही है। बिजली कंपनी ने मंगलवार शाम तक कई इलाकों में स्ट्रीट लाइट के कनेक्शन काट दिए थे जिसकी वजह से रात पर सड़कें अंधेरे में रही है। ऐसे इलाकों स गुजरने वाले लोगों को परेशान होना पड़ा। अंधेरे का फायदा उठाकर बदमाश भी दो दिन से सड़कों पर सक्रिय हो रहे हैं। बड़ी घटना हो सकती है, इसकी फिक्र न तो बिजली कंपनी को है और न ही निगम को है। दोनों अधिकारियों की हठधर्मिता के कारण एक के बाद एक इलाकों की स्ट्रीट लाइटें बंद हो रही है।
ठेकेदारों को भुगतान करने में निगम अव्वल
बिजली कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि निगम के अधिकारी ठेकेदारों का बकाया भुगतान करने में अव्वल है लेकिन बिजली कंपनी को बकाया बिल की राशि नहीं पूर्व में हर माह बकाया भुगतान को तय समय से जमा करने पर सहमति बनी थी। सूत्रों की माने तो बिजली कंपनी का बकाया चुकाने में निगम के अधिकारियों को फायदा नहीं है लेकिन ठेकेदारों का भुगतान करने में अच्छा खासा फायदा बताया जाता है।
बड़े बकायादारों पर हाथ नहीं डाल रही बिजली कंपनियां
मप्र में बिजली कंपनियों का जाल बड़ा है। हमेशा बिजली कंपनिया खुद को घाटे में बता रही है। यह हालत तब है जब हर माह कंपनी को बकाया बिजली बिल के बदले करोड़ों रुपये मिल रहे हैं। आए दिन कंपनी पर अधिक बिल वसूली के आरोप लगते रहे हैं। मीटर में खराबी के कारण ज्यादा रीडिंग दर्शाने पर मनमाना बिल देने के आरोप भी लग चुके हैं। इनमें से अधिकतर उपभोक्ता तो बिल की राशि चुकाते हैं।