स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की आज 93वीं जयंती है। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के अयोध्या शहर में लता जी के नाम पर एक चौक का उद्घाटन किया गया है। 'भारत रत्न' स्व. लता मंगेशकर जी की जयंती पर आज अयोध्या में उनकी स्मृति में निर्मित 'लता मंगेशकर चौक' का लोकार्पण सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया। इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि यह भव्य चौक लता दीदी व प्रभु श्रीराम के प्रति उनके समर्पण का निरंतर स्मरण कराता रहेगा।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 'लता मंगेशकर चौक' के उद्घाटन समारोह में जुड़ें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि, लता जी, मां सरस्वती की एक ऐसी ही साधिका थीं, जिन्होंने पूरे विश्व को अपने दिव्य स्वरों से अभिभूत कर दिया। अयोध्या में लता मंगेशकर चौक पर स्थापित की गई, मां सरस्वती की विशाल वीणा संगीत की साधना का प्रतीक बनेगी। मैं इस अभिनव प्रयास के लिए योगी सरकार का, अयोध्या विकास प्राधिकरण का और अयोध्या की जनता का हृदय से अभिनंदन करता हूं।
मन की अयोध्या तब तक सूनी, जब तक राम ना आए- PM
पीएम मोदी ने आगे कहा कि लता दीदी के साथ जुड़ी मेरी कितनी ही यादें हैं, कितनी ही भावुक और स्नेहिल स्मृतियां हैं। जब भी मेरी उनसे बात होती, उनकी वाणी की युग-परिचित मिठास हर बार मुझे मंत्र-मुग्ध कर देती थी। दीदी अक्सर मुझसे कहती थी कि मनुष्य उम्र से नहीं, कर्म से बड़ा होता है।
उन्होंने कहा कि जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन संपन्न हुआ था, तो मेरे पास लता दीदी का फोन आया था। वो बहुत खुश थीं, आनंद में थी। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि आखिरकार राम मंदिर का निर्माण शुरू हो रहा है। आज मुझे लता दीदी का गाया वो भजन भी याद आ रहा है, 'मन की अयोध्या तब तक सूनी, जब तक राम ना आए'। अयोध्या के भव्य मंदिर में श्रीराम आने वाले हैं और उससे पहले करोड़ों लोगों में राम नाम की प्राण प्रतिष्ठा करने वाली लता दीदी का नाम अयोध्या शहर के साथ हमेशा के लिए स्थापित हो गया है।
ये चौक कला जगत से जुड़े लोगों के लिए होगी प्रेरणा स्थली-
पीएम मोदी बोले, प्रभु राम तो हमारी सभ्यता के प्रतीक पुरुष हैं। राम हमारी नैतिकता के, हमारे मूल्यों, हमारी मर्यादा, हमारे कर्तव्य के जीवंत आदर्श हैं। अयोध्या से लेकर रामेश्वरम तक, राम भारत के कण-कण में समाये हुये हैं। लता दीदी के नाम पर बना ये चौक, हमारे देश में कला जगत से जुड़े लोगों के लिए भी प्रेरणा स्थली की तरह कार्य करेगा। ये बताएगा कि भारत की जड़ों से जुड़े रहकर, आधुनिकता की ओर बढ़ते हुए, भारत की कला और संस्कृति को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाना, ये भी हमारा कर्तव्य है। भारत की हजारों वर्ष पुरानी विरासत पर गर्व करते हुए, भारत की संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना, ये भी हमारा दायित्व है।