भोपाल: प्रदेश के नेशनल पार्कों एवं अन्य अभ्यारण्यों में आने वाले पर्यटकों से वसूले जाने वाले शुल्क तथा उसे खर्च करने का विवरण अब राज्य के वन विभाग के आम बजट में दिखाना होगा। अब तक इस गेट मनी को वन विभाग अपने बजट में प्रदर्शित नहीं करता था।

गेट मनी से वन विभाग को करीब 25 करोड़ रुपयों की आय होती है तथा वह इसे इन नेशनल पार्कों में ही पर्यटकों की सुविधा पर खर्च करता है। इस गेट मनी को केबिनेट के निर्णय अनुसार हर नेशनल पार्क का फील्ड डायरेक्टर बैंक में खाता खोलकर रखता है तथा वन विभाग की एक उच्च स्तरीय समिति से अनुमोदन लेकर इसे व्यय करता है। लेकिन इस गेट मनी को वन विभाग के आम बजट में नहीं दिखाया जाता था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वित्त विभाग की आपत्ति आने पर अब इसे आम बजट में दिखाने के वन विभाग को निर्देश दिये हैं। इस गेट मनी को अब वन विभाग के आम बजट जोकि अगले वित्तीय वर्ष 2022-23 का होगा, में क्रमांक 88501-वन पर्यटन से प्राप्त आय के अंतर्गत दिखायेगा।

दरअसल वित्त विभाग की आपत्ति थी कि गेट मनी को न दिखाकर वन विभाग अलग से और बजट मांग लेता है। अब बजट में गेट मनी दिखने से वित्त विभाग अलग से वन विभाग को बजट नहीं प्रदान करेगा तथा इसे सरकार के इन्टीग्रटेड फायनेन्शियल मेनेजमेंट सिस्टम पोर्टल पर देखा एवं सर्च किया जा सकेगा।

टाईगर फाउण्डेशन का धन भी नहीं दिखाते: 

वन विभाग के अंतर्गत वन्यप्राणी शाखा में एक टाईगर फाउण्डेशन भी बना हुआ है जो सोसायटी एक्ट के तहत गठित है। इसमें कान्हा किसली आने वाले अम्बानी परिवार सहित अन्य उद्योगपतियों आदि से भारी भरकम राशि दान में प्राप्त होती है। इस समय इस फाउण्डेशन में करीब 18 करोड़ रुपये जमा हैं। इसका व्यय भी एक कार्यकारी सामिति के माध्यम से कर दिया जाता है तथा इसे वन विभाग के आम बजट में नहीं दिखाया जाता है। चूंकि फाउण्डेशन में सभी शासकीय सेवक हैं, इसलिये इसे भी वन विभाग के बजट में दिखाया जाना चाहिये, जबकि ऐसा नहीं किया जा रहा है। कुछ वर्षों पूर्व कैम्पा में मिली धनराशि भी वन विभाग के बजट में नहीं दिखाई जाती थी जिस पर आपत्ति होने पर अब यह बजट में दिखाई जाने लगी है। कैम्पा के तहत मिलने वाली धनराशि बजट में प्रदर्शित होने से अब वन विभाग को राज्य के वित्त विभाग से मिलने वाले बजट में कमी भी हो गई है।