भोपाल: राज्य सरकार ने दस साल बाद तेंदूपत्ता संग्रहकों के बोनस में 5 प्रतिशत का इजाफा कर दिया है। पहले तेंदूपत्ता संग्रहकों को तेंदूपत्ता के विक्रय से होने वाली शुध्द आय का 70 प्रतिशत भाग बोनस यानि प्रोत्साहन राशि के रुप में दिया जाता था जिसे अब बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है।
केबिनेट के निर्णय के बाद वन विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार, 75 प्रतिशत भाग तेंदूपत्ता संग्राहकों को उनके द्वारा संग्रहित मात्रा के अनुपात में प्रोत्साहन पारिश्रमिक के रूप में वितरित करने हेतु प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों को अंतरित किया जायेगा।
शेष 25 प्रतिशत में से 10 प्रतिशत भाग वन विभाग की देख-रेख में स्थल विशिष्ट की आवश्यकतानुसार वनों के पुनरूत्पादन, लघु वनोपज प्रजातियों के अन्त: एवं बाह्य स्थलीय संरक्षण, अनुसंधान एंव विकास, लघु वनोपजों के संरक्षण एवं संवर्धन संबंधी परियोजनाओं, लघु वनोपज एवं वनों के संरक्षण, संवर्धन एवं जागरूकता हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन तथा लघु वनोपज प्रजातियों के वन क्षेत्रों में रोपण कार्य किया जायेगा।
इसी प्रकार, अब बचे 15 प्रतिशत में से 5 प्रतिशत भाग ग्राम सभा के नियंत्रणाधीन सामुदायिक वन प्रबंधन समिति को अंतरित किया जायेगा जबकि 10 प्रतिशत भाग लघु वनोपज के संग्रहण, भण्डारण, विपणन, प्रचार-प्रसार, प्रोत्साहन आदि से संबंधित अधोसंरचनाएं, वन ग्रामों की अधोसंरचना एवं मूलभूत सुविधाओं का विकास, वन विभाग एवं लघु वनोपज समितियों की अधोसंरचनाए एवं संग्राहकों के लिए लघु वनोपज संघ द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु मप्र राज्य लघु वनोपज संघ को अंतरित किया जायेगा।
उल्लेखनीय है कि पहले शुध्द आय का 70 प्रतिशत तेंदूपत्ता संग्रहकों को बोनस के रुप में देने के बाद 15 प्रतिशत भाग वनों के पुनरुत्पादन पर लगाया जाता था तथा शेष 15 प्रतिशत भाग सहकारी समितियों को उनकी प्राथमिकता के आधार पर उनकी मांग अनुसार ग्राम की मूलभूत सुविधाओं के विकास में दिया जाता था।