भोपाल: नीमच जिले के चर्चित तेंदुआ हत्याकांड में छह महीने बाद भी जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है। पूरे मामलो में तत्कालीन एसडीओ प्रदीप कछावा, रेंजर शाश्वत द्विवेदी और डीएफओ एसके अटोदे की भूमिका बहुत संदिग्ध रही है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले के वास्तविक आरोपी को बचाने के लिए तीनों अधिकारियों ने जांच की दिशा बदल दी। यही नहीं, शुरुआती बयानों में जब मुख्य आरोपी का नाम सामने आया तब कथित रूप से बयान बदलवाकर पूरा मामला मजदूरों के सिर मढ़ दिया गया। यानि शुरुआती बयान में खेत मालिक की भूमिका का जिक्र प्रकाश में आया किन्तु बाद में गवाह पर दबाव डालकर पूरी कहानी ही बदल दी गई। शिकायत कर्ता और ग्रामीणों की मांग है कि तेंदुए की हत्या के मामले में सभी आरोपियों और अधिकारियों की कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन, डिजिटल सबूत और बैंक लेनदेन की जांच करवाई जावे। मूल बयान और केस डायरी जब्त करके फॉरेंसिक जांच करवाई जावे।
मामला मनासा तहसील के ग्राम परवानी का है। आरोप है कि 3 जनवरी 26 को जगदीश बिंदल उर्फ बाबू सेठ के खेत में करंट प्रवाहित अवैध बाड़ में एक तेंदुआ फंस गया था। शिकायत के अनुसार 4 जनवरी की सुबह सुनील वहां गया तो उसने तेंदुए को फंसे बाड़ में फंसकर तड़पते देखा उसने अपने जीजा देवीलाल ने दी। बाद में देवीलाल ने देखा कि तेंदुआ पूरी तरह मृत नहीं था, बल्कि अर्धमूर्छित अवस्था में था। आरोप है कि खेत मालिक के कहने पर वहां कार्यरत श्रमिक देवीलाल ने कुल्हाड़ी से उसके सिर पर वार कर तेंदुए को मार दिया और शव को सूखे घास के नीचे छिपाकर रात में जंगल में फेंक दिया। 5 जनवरी 26 को वन प्रकरण प्रकाश में आया।
वन विभाग के समक्ष दर्ज प्रारंभिक बयान में सह-आरोपी अंबालाल ने भी इस घटनाक्रम का उल्लेख किया था, जिसमें खेत मालिक जगदीश बिंदल उर्फ बाबू सेठ की मौजूदगी और बाद में शव ठिकाने लगाने की बात कही गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बाद में तीनों मजदूरों के बयान बदल गए और उन्होंने पूरी घटना की जिम्मेदारी स्वयं पर ले ली। अम्बा लाल के दोनों बयानों की प्रति अख़बार के पास उयलब्ध है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह बदलाव स्वेच्छा से नहीं हुआ बल्कि कथित दबाव, धमकी और आर्थिक सहायता के आश्वासन के कारण कराया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मजदूरों को भरोसा दिलाया गया कि यदि वे खेत मालिक का नाम नहीं लेंगे तो उनके परिवार की आर्थिक मदद की जाएगी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
छह माह बाद जांच लंबित
5 जनवरी 26 को मनासा वनपरिक्षेत्र अंतर्गत बीट बैसदा में एक तेंदुआ मृत मिला था। जिसके संबंध में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 2563/04 के अंतर्गत दर्ज कर तेंदुए के शिकार में लिप्त 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। प्रकरण के संबंध में 26 मई 26 को एक शिकायत प्राप्त हुई। जिसमें प्रकरण की विवेचना कार्यवाही में लापरवाही बरतने संबंधी गंभीर आरोप लगाते हुए लेख किया गया कि प्रकरण में लिप्त मुख्य आरोपी को गिरफ्तार ही नहीं किया गया है। शिकायत के साथ में कुछ दस्तावेज भी संलग्न किये गये है।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए एपीसीसीएफ एल कृष्णमूर्ति ने प्रकरण की सूक्ष्मता से जांच करने हेतु जितेन्द्र बंसल, सहायक प्रभारी अधिकारी स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स भोपाल और शरद जाटव, प्रभारी अधिकारी स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स इकाई, इंदौर सदस्यों को शामिल कर एक जांच समिति (SIT) का गठन किया। कृष्णमूर्ति ने समिति को एक महीने में जांच प्रतिवेदन देने के निर्देश दिए थे परन्तु छह माह बाद भी रिपोर्ट लंबित है। जांच समिति का कहना है कि कुछ लोगों के बयान अभी शेष हैं। सूत्रों का कहना है कि जांच में ‘मुख्य आरोपी को क्लीन चिट दिलाने की कोशिश हो रही है।
जांच समिति बोली—’कुछ बयान बाकी हैं’
घटना को छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक विभाग किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका है।जांच समिति के सदस्य जितेंद्र बंसल और शरद जाटव के अनुसार—”जांच अभी जारी है। कुछ लोगों के बयान होना शेष हैं। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट विभागीय टास्क फोर्स को सौंप दी जाएगी।” इस संबंध में खेत मालिक जगदीश बिंदल उर्फ बाबू सेठ से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
बड़ा सवाल: क्या असली आरोपी तक पहुंचेगी जांच?
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत अनुसूची-1 के वन्यप्राणी तेंदुए की हत्या अत्यंत गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच अपेक्षित होती है, लेकिन इस मामले में जांच रिपोर्ट लंबित रहने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं—
-क्या शुरुआती बयानों की दोबारा जांच होगी?
-क्या कथित मुख्य आरोपी की भूमिका की स्वतंत्र पड़ताल होगी?
-क्या डिजिटल साक्ष्य और कॉल रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे?
-क्या जांच समिति तय समय से कई गुना अधिक विलंब का कारण बताएगी?
इन सवालों के जवाब अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
डीएफओ अटोदे ने दी सफाई
तेंदुए की हत्या में डीएफओ एसके अटोदे से यह पूछा कि आप मुख्य आरोपी के बचाने का आरोप लग रहा है। उनका जवाब है कि आरोप निराधार है। जहां तक बयान बदले जाने का सवाल है, उसके लिए एसडीओ प्रदीप और रेंजर जाने। दोनों ने ही बयान दर्ज किए हैं।