यूक्रेन संकट: क्या भारत रूस के साथ रक्षा संबंध तोड़ सकता है..!
1990 के दशक में सोवियत संघ के विघटन के बाद से रूस भारत का एक महत्वपूर्ण रक्षा सहयोग रहा है। भारत की पाकिस्तान के साथ पुरानी दुश्मनी है और चीन के साथ उसके संबंध इस समय सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं, इसलिए रूस के साथ भारत के संबंध बहुत महत्वपूर्ण हैं। वैश्विक हथियारों के व्यापार पर नज़र रखने वाली संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) के मुताबिक 1992 से अब तक भारत की दो-तिहाई हथियारों की खरीद रूस से हुई है।पिछले एक दशक में, रूसी हथियारों पर भारत की निर्भरता कम हुई है और अन्य देशों, विशेषकर फ्रांस से हथियार खरीदे गए हैं। इसके अलावा भारत ने इजरायल, अमेरिका और ब्रिटेन से भी हथियार खरीदे हैं, लेकिन इन हथियारों की मात्रा कम है। साथ ही, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भारत के सैन्य और सुरक्षा संबंध मजबूत हो रहे हैं। 2018-19 के बीच दोनों देशों के बीच रक्षा व्यापार में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हाल ही में पेंटागन द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि भारत और अमेरिका अंतरिक्ष रक्षा और साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं।
भारत ने यूक्रेन पर हमले के लिए रूस की आलोचना नहीं की। भारत ने साफ कर दिया है कि वह इस संघर्ष में किसी का पक्ष नहीं लेगा।भारत के पास रूस पर अपनी निर्भरता कम करने का विकल्प है, जो वर्तमान में कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।यूक्रेन में रूस को जिस तरह का नुकसान हुआ है, उससे पता चलता है कि रूस भारत की जरूरतों को पूरा करने के बजाय अपने संसाधनों का इस्तेमाल अपनी रक्षा प्रणाली में सुधार करने के लिए करेगा और भारत को समय पर जरूरत के पुर्जे नहीं मिल पाएंगे ।यूक्रेन में युद्ध के मैदान में कुछ रूसी उपकरण विफल भी हुए हैं।भारत की सेना रूसी हथियारों के बिना रूस के साथ प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाएगी। और भारतीय सेना निकट भविष्य में भी रूसी हथियारों पर निर्भर होगी।" ऐसे में फिलहाल तो नहीं लगता कि भारत रूस से अपने रिश्ते खत्म करेगा लेकिन प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया पॉलिसी और रूस की यूक्रेन में असफलता के बाद भारत धीरे-धीरे रूस से अपनी निर्भरता जरूर खत्म करने पर काम करेगा|