भोपाल। राज्य सरकार ने शुक्रवार को नये जेल उद्योग सिध्ददोष व्यक्तियों का नियोजन और बंदी पुनर्वास नियम जारी किये जिसके तहत अब जेलों में उद्योग स्थापित होंगे तथा बंदियों द्वारा इन उद्योगों से उत्पादित माल का शासकीय विभागों एवं कार्यालयों तथा अर्ध सरकारी संस्थाओं में भी लागत पर 20 प्रतिशत लाभ लेकर विक्रय होगा।

निजी संस्थाओं एवं व्यक्तियों को 30 प्रतिशत लाभ लेकर तथा स्वयं जेलों के उपयोग के लिये 10 प्रतिशत लाभ लेकर विक्रय किया जायेगा। बदले में बंदियों को मानदेय का भुगतान किया जायेगा।

केंद्रीय जेल जबलपुर में ये उद्योग स्थापित होंगे :

नियमों में प्रदेश की विभिन्न 11 केंद्रीय जेलों में स्थापित किये जाने वाले उद्योगों की सूची भी दी गई है। केंद्रीय जेल जबलपुर में ऑफसेट प्रिन्टिंग, बुनाई, बढ़ईगिरी, लौहारी एवं सिलाई उद्योग स्थापित होगा जबकि केंद्रीय जेल सतना में बुनाई, सिलाई, बढ़ईगिरी, कम्बल, स्क्रीन/ऑफसेट प्रिङ्क्षटग होगी। केंद्रीय जेल नरसिंहपुर में बुनाई, सिलाई, बढ़ईगिरी, पावरलूम, लौहारी एवं प्रिंटिंग तथा केंद्रीय जेल रीवा में बुनाई, प्रिंटिंग, बढ़ईगिरी एवं लौहारी स्थापित होगी। केंद्रीय जेल भोपाल में पावरलूम, बुनाई, बढ़ईगिरी, लौहारी, सिलाई, प्रिंटिंग प्रेस, चप्पल, चित्रकारी, महिलाओं हेतु सिलाई, गुडिय़ा बनाना, फिनाईल उत्पादन होगा।